भोपाल। स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में महिला चिकित्सक की आत्महत्या के मामले ने अब गंभीर रूप ले लिया है। इस प्रकरण में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लेते हुए पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को नोटिस जारी कर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है।
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने सोशल मीडिया पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि एम्स भोपाल में डॉक्टर सृष्टि द्वारा विभागाध्यक्ष डॉक्टर परवेज पर लगातार प्रताड़ना और सार्वजनिक अपमान करने के आरोप लगाए गए थे। शिकायत के अनुसार, इस मानसिक उत्पीड़न से परेशान होकर डॉक्टर सृष्टि ने बेहोशी की दवा की अधिक मात्रा लेकर आत्महत्या जैसा जघन्य कदम उठा लिया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पीड़ित डॉक्टर ने प्रताड़ना के संबंध में तीन बार संस्थान प्रबंधन से शिकायत की थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि प्रबंधन ने मामले को दबाने का प्रयास किया, जिसके बाद यह दुखद घटना सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने भोपाल पुलिस, एम्स प्रबंधन और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय को नोटिस भेजकर पूरे घटनाक्रम की जांच करने तथा विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
प्रियंक कानूनगो ने कहा कि एक प्रतिभाशाली चिकित्सक की इस तरह मृत्यु होना बेहद दुखद और चिंताजनक है। आयोग का प्रयास रहेगा कि दोषियों को दंड मिले और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए व्यवस्था में सुधार किया जाए। गौरतलब है कि इससे पहले भी एम्स भोपाल में एक महिला डॉक्टर की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु का मामला सामने आया था, जिसने संस्थान के कार्य वातावरण पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
एम्स भोपाल में महिला डॉक्टर की आत्महत्या, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग का स्वास्थ्य विभाग को नोटिस


