बालाघाट। किरनापुर में मरार माली समाज के आंदोलन के बाद मामला अब पुलिस कार्रवाई और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण में पहुंच गया है। 15 सितंबर को चौधरी दंपती के साथ कथित पुलिस मारपीट के विरोध में समाज ने प्रदर्शन किया था। प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग किरनापुर थाने पहुंचे, जहां स्थिति बिगड़ने के बाद पथराव, तोड़फोड़ और पुलिस द्वारा भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किए जाने की जानकारी सामने आई। पुलिस ने बाद में वीडियो और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की पहचान शुरू की।
पुलिस कार्रवाई से शुरू हुआ विवाद
मामले की शुरुआत टिमकीटोला निवासी कैलाश चौधरी और उनकी पत्नी सावित्री चौधरी से जुड़े पुलिस कार्रवाई के आरोपों से हुई। मरार माली समाज का आरोप है कि चोरी के मामले की जांच के दौरान पुलिस ने दंपती को हिरासत में लिया और थाने में उनके साथ कथित तौर पर मारपीट की। इस मामले में पुलिस अधीक्षक ने चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर एसआईटी जांच शुरू कराई थी। समाज की ओर से दोषी पुलिसकर्मियों पर कड़ी कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की गई थी।
थाने के घेराव के दौरान बिगड़े हालात
15 सितंबर को समाज के प्रदर्शन के दौरान बड़ी संख्या में लोग किरनापुर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का एक समूह थाने की ओर गया और इसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। पुलिस के अनुसार भीड़ की ओर से थाने में प्रवेश करने का प्रयास, पथराव और तोड़फोड़ की गई। जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया। पथराव में कई पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी रिपोर्ट सामने आई है। पुलिस ने घटना से जुड़े लोगों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज और सामने आए वीडियो का इस्तेमाल शुरू किया।
50 से अधिक लोगों की पहचान की रिपोर्ट
घटना के बाद पुलिस कार्रवाई का दायरा बढ़ा है। 17 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने थाने में तोड़फोड़ और पथराव के मामले में 24 आरोपियों को चिन्हित कर न्यायालय में पेश किया, जिनमें से 17 को न्यायिक अभिरक्षा में भेजा गया और 7 को पुलिस रिमांड पर लिया गया। दूसरी ओर, पुलिस की जांच में 50 से अधिक लोगों की पहचान किए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है। हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में चिन्हित और आरोपी बनाए गए लोगों की संख्या अलग-अलग बताई गई है।
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नन्नो कावरे और हीना कावरे की भूमिका पर उठ रहे सवाल
घटनाक्रम के बाद स्थानीय स्तर पर राजनीतिक नेतृत्व की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। पूर्व मंत्री नन्नो कावरे और पूर्व विधायक हीना कावरे को लेकर चर्चा है कि उन्होंने इस पूरे मामले में क्या सार्वजनिक पहल की और पीड़ित परिवार तथा आंदोलन से जुड़े लोगों के मुद्दे पर उनका रुख क्या रहा।
हालांकि, इन सवालों पर दोनों नेताओं की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने आने तक उनकी भूमिका को लेकर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों में हीना कावरे के पीड़ित परिवार से मुलाकात किए जाने की बात कही गई है, लेकिन आंदोलन के दौरान उनकी भूमिका या बाद की कानूनी कार्रवाई को लेकर अलग से आधिकारिक जानकारी स्पष्ट नहीं है।
अब इस मामले में दो समानांतर जांच महत्वपूर्ण हैं—एक ओर चौधरी दंपती द्वारा लगाए गए पुलिस कार्रवाई के आरोपों की एसआईटी जांच और दूसरी ओर 15 सितंबर के प्रदर्शन में पथराव, तोड़फोड़ और कानून-व्यवस्था बिगाड़ने के आरोपों की पुलिस जांच। इन दोनों जांचों के निष्कर्ष ही आगे की कार्रवाई की दिशा स्पष्ट करेंगे।

