मप्र के स्वास्थ्य विभाग की नई तबादला नीति को लेकर विवाद और चर्चा तेज हो गई है। विभाग ने विधवा और परित्यक्ता महिला कर्मचारियों के लिए एक ऐसी शर्त जोड़ दी है, जिसे कई लोग असामान्य और संवेदनशील मान रहे हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, तबादले के लिए आवेदन करने से पहले इन महिला कर्मचारियों को एसडीएम या न्यायालय से प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा, जिसमें उनकी वैवाहिक स्थिति की पुष्टि की गई हो। स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों के मुताबिक, केवल ऑनलाइन आवेदन पर्याप्त नहीं होगा। आवेदन के साथ शपथ पत्र के अलावा संबंधित प्रमाण पत्र भी अनिवार्य रूप से संलग्न करना होगा। यानी कर्मचारी को पहले प्रशासनिक स्तर पर अपनी स्थिति प्रमाणित करनी होगी, तभी तबादले की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी। सरकार का तर्क है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य पारदर्शिता बनाए रखना और गलत दावों को रोकना है। लेकिन इस फैसले ने कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं। कर्मचारी संगठनों और कुछ वर्गों का मानना है कि यह प्रक्रिया विशेष रूप से महिलाओं के लिए अतिरिक्त औपचारिकता और असुविधा पैदा कर सकती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि प्रदेश के अन्य विभागों की तबादला नीतियों में ऐसी कोई शर्त नहीं है। स्कूल शिक्षा विभाग समेत कई विभागों में केवल ऑनलाइन घोषणा के आधार पर आवेदन स्वीकार किए जाते हैं। ऐसे में केवल स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह अलग नियम लागू करना भी चर्चा का विषय बन गया है। नई नीति के अनुसार, राज्य स्तर के तबादला आवेदन ई-एचआरएमएस पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन स्वीकार किए जाएंगे। आवेदन प्रक्रिया 8 जून से 12 जून तक चलेगी। विभाग ने जिलों में हेल्प डेस्क स्थापित करने के भी निर्देश दिए हैं ताकि कर्मचारियों को तकनीकी सहायता मिल सके।हालांकि सरकार इसे प्रशासनिक सुधार का हिस्सा बता रही है, लेकिन कर्मचारियों के बीच इसे लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। कुछ लोग इसे व्यवस्था सुधारने की दिशा में कदम मान रहे हैं, जबकि कई इसे संवेदनशील मामलों में अनावश्यक औपचारिकता करार दे रहे हैं।
–मिलिंद ठाकरे

