मुरैना: देश में चीनी की कीमतें बढ़ने के बीच केंद्र सरकार ने बाजार में सप्लाई बनाए रखने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने का फैसला किया है। दूसरी ओर मध्य प्रदेश की छह बड़ी चीनी मिलें वर्षों से बंद पड़ी हैं। कहीं करोड़ों का कर्ज है, तो कहीं मशीनरी और जमीन विवादों में हैं। इसका असर किसानों, कर्मचारियों और स्थानीय कारोबार पर पड़ा है।
15 साल से बंद मिल शुरू कराने की मांग
मुरैना की कैलारस शुगर मिल को दोबारा शुरू कराने की मांग ने बंद मिलों का मुद्दा फिर गरमा दिया है। करीब 15 साल से बंद मिल के लिए कांग्रेस विधायक पंकज उपाध्याय ने आमरण अनशन किया। सरकार के आश्वासन के बाद अनशन खत्म हुआ, लेकिन किसानों और कर्मचारियों में नाराजगी कायम है। उनका कहना है कि 2017 के बाद मिल शुरू करने के दो प्रयास कागजी कार्रवाई से आगे नहीं बढ़ सके।
MP की 6 चीनी मिलें बंद, हर मिल की कहानी में अलग संकट
क्या MP की बंद मिलों से महंगी हुई चीनी?
विशेषज्ञों के अनुसार MP की बंद मिलें देश में चीनी महंगी होने की सीधी वजह नहीं हैं। कीमतों पर मौसम, गन्ने का उत्पादन, शुगर रिकवरी, निर्यात और त्योहारों की मांग का असर है। अत्यधिक बारिश से रिकवरी 12% से नीचे आने पर उत्पादन प्रभावित हुआ। एथेनॉल डायवर्जन ने भी उपलब्धता पर असर डाला, हालांकि सरकार के मुताबिक इसका हिस्सा 2022-23 के 12% से घटकर 2025-26 में करीब 9% रह गया।
नवंबर 2025 और फरवरी 2026 में 20 लाख टन निर्यात की अनुमति दी गई, जिसमें मई तक करीब 8 लाख टन चीनी निर्यात हुई। त्योहारों की बढ़ी मांग और जमाखोरी ने भी कीमतों पर दबाव बढ़ाया।

