ग्वालियर। मध्य प्रदेश के ग्वालियर जिले में रेबीज से चौथी मौत ने स्वास्थ्य व्यवस्था और जन-जागरूकता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। छतरपुर जिले के नौगांव निवासी युवक को 24 जनवरी को कुत्ते ने काट लिया था, लेकिन उसने समय पर एंटी-रेबीज टीका नहीं लगवाया। संक्रमण बढ़ने पर उसे ग्वालियर रेफर किया गया, जहां निजी चिकित्सालय में उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। चिकित्सकों के अनुसार, टीका न लगने से शरीर में वायरस तेजी से फैल गया और जानलेवा स्थिति बन गई।
ग्वालियर में फरवरी महीने की शुरुआत से अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें एक छह वर्षीय मासूम भी शामिल है। दतिया जिले के हंस प्रजापति को एंटी-रेबीज़ टीके की तीन खुराक लग चुकी थीं, परिजन चौथी और अंतिम खुराक से पहले ही उसे डिस्चार्ज कर घर ले गए। घर पहुंचने के बाद उसकी स्थिति बिगड़ी और मुंह से लार बहना शुरू हो गया, जो रेबीज का गंभीर लक्षण है। कुछ ही समय में उसने दम तोड़ दिया।
पहली मौत गिरवाई क्षेत्र में 48 वर्षीय किरण लालवानी की हुई, जिन्हें स्थानीय चिकित्सक ने केवल टिटनेस इंजेक्शन देकर एंटी-रेबीज़ टीका देने से मना कर दिया था। इस मामले में डॉक्टर पर लापरवाही का प्रकरण दर्ज किया गया है। वहीं टीकमगढ़ की 65 वर्षीय महिला की मौत भी समय पर टीका न मिलने के कारण हुई।
लगातार बढ़ती मौतें बता रही हैं कि स्ट्रीट डॉग नियंत्रण, टीकाकरण उपलब्धता और लोगों में जागरूकता-तीनों में सुधार की तत्काल आवश्यकता है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर इलाज हो तो रेबीज़ पूरी तरह रोका जा सकता है, लेकिन लापरवाही हर बार मौत का कारण बन रही है।
ग्वालियर में रेबीज से चौथी मौत, लापरवाही और सिस्टम की कमजोरी फिर उजागर
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