नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस अब सिर्फ कंप्यूटर साइंस का विषय नहीं रह गया है। ब्रिक्स देशों के शिक्षा मंत्रियों ने 2025 में शिक्षा में AI के इस्तेमाल, AI साक्षरता और जिम्मेदारी AI को लेकर संयुक्त घोषणा की थी। इसमें AI को सीखने के नतीजे बेहतर करने, शिक्षा को ज्यादा व्यक्तिगत बनाने और शिक्षा से जुड़े अंतर को कम करने की क्षमता वाला बताया गय। साथ ही डेटा प्राइवेसी, एल्गोरिथमिक बायस और एथिकल यूज जैसी परीक्षाओं पर भी जोर दिया गया।
यूनिवर्सिटी सिर्फ डिग्री नहीं, स्किल्स पर क्यों जोर दे रहीं?
ब्रिक्स देशों ने टेक्निकल और वोकेशनल एजुकेशन और ट्रेनिंग यानी TVET को भी अपनी एजुकेशन कोऑपरेशन का अहम हिस्सा बनाया है। 2026 में भारत की अध्यक्षता के दौरान BRICS-TCA की मीटिंग में डिजिटल और ग्रीन ट्रांज़िशन से जुड़े वर्कफोर्स ज़ीरो पर चर्चा हुई। भारत ने BRICS इंटरनेशनल स्किल गैप स्टडी और BRICS स्किल्स कॉम्पिटिशन जैसे प्रस्ताव भी रखे.
IoT और रोबोटिक्स का क्या होगा?
फ्यूचर स्किल्स की चर्चा सिर्फ़ AI तक लिमिटेड नहीं है। BRICS के TVET कोऑपरेशन में पहले ही इंटरनेट ऑफ़ थिंग्स (IoT), स्मार्ट सिटीज़, स्मार्ट हेल्थकेयर, ड्रोन टेक्नोलॉजी, ब्लॉकचेन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी नई पीढ़ी की स्किल्स को शामिल करने की बात सामने आ चुकी है। ऐसे में इंजीनियरिंग और वोकेशनल एजुकेशन में इन क्षेत्रों से जुड़े प्रैक्टिकल कोर्स और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड ट्रेनिंग की भूमिका बढ़ सकती है।
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स्पेस टेक्नोलॉजी में क्या बदल रहा है?
BRICS के लिए स्पेस भी तेज़ी से उभरता हुआ कोऑपरेशन एरिया है. जून 2026 में बेंगलुरु में BRICS हेड्स ऑफ स्पेस एजेंसियों की मीटिंग हुई, जिसमें सदस्य देशों ने रिमोट सेंसिंग सैटेलाइट कॉन्स्टेलेशन और स्पेस सस्टेनेबिलिटी जैसे सब्जेक्ट्स पर चर्चा की। इससे स्पेस साइंस, सैटेलाइट टेक्नोलॉजी, रिमोट सेंसिंग, अर्थ ऑब्जर्वेशन और स्पेस डेटा जैसे क्षेत्रों में रिसर्च और स्किल्स कोऑपरेशन की बढ़ोतरी हो रही है।

