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सोना-चांदी में बड़ी गिरावट! 8 दिन में चांदी ₹22 हजार टूटी, सोना भी ₹3,470 फिसला

नई दिल्ली। सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बड़ी खबर है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में बढ़ती अनिश्चितता और मिडिल ईस्ट में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब भारतीय बुलियन मार्केट पर भी दिखाई देने लगा है। सोमवार को सोने और चांदी की कीमतों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार 24 कैरेट सोने की कीमत 3,470 रुपए टूटकर 1.51 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई, जबकि चांदी 15,748 रुपए की भारी गिरावट के साथ 2.41 लाख रुपए प्रति किलोग्राम पर आ गई।

8 दिनों में चांदी ₹22 हजार सस्ती

चांदी में लगातार गिरावट का दौर जारी है। सिर्फ जून महीने के शुरुआती 8 दिनों में ही चांदी करीब 22 हजार रुपए प्रति किलो तक टूट चुकी है। 31 मई को चांदी की कीमत 2.63 लाख रुपए प्रति किलो थी, जो अब घटकर 2.41 लाख रुपए रह गई है। इससे चांदी में निवेश करने वाले निवेशकों को बड़ा झटका लगा है।

ऑल टाइम हाई से सोना-चांदी में बड़ी गिरावट

बता दें इस साल की शुरुआत में सोना और चांदी दोनों ने रिकॉर्ड स्तर छुए थे। 29 जनवरी 2026 को सोना 1.76 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया था। वहीं चांदी 3.86 लाख रुपए प्रति किलो के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंची थी। लेकिन उसके बाद बाजार में लगातार दबाव बना हुआ है। मौजूदा स्तर पर सोना अपने रिकॉर्ड हाई से करीब 25 हजार रुपए और चांदी करीब 1.45 लाख रुपए प्रति किलो तक नीचे आ चुकी है।

आखिर क्यों गिर रहे हैं सोना और चांदी?

आमतौर पर युद्ध और वैश्विक तनाव के दौरान सोना-चांदी सुरक्षित निवेश माने जाते हैं और इनके दाम बढ़ते हैं, लेकिन इस बार तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे रही है।

निवेशक कैश को दे रहे प्राथमिकता

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण निवेशक अपने निवेश को नकदी में बदल रहे हैं। अनिश्चित माहौल में लोग लिक्विड कैश रखना ज्यादा सुरक्षित समझ रहे हैं, जिसके चलते सोना और चांदी में बिकवाली बढ़ गई है।

रिकॉर्ड मुनाफे के बाद प्रॉफिट बुकिंग

जनवरी में सोना और चांदी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए थे। ऐसे में बड़े निवेशकों और फंड्स ने मुनाफा वसूली शुरू कर दी। भारी बिकवाली के कारण बाजार में सप्लाई बढ़ी और कीमतों पर दबाव बन गया।

खरीदारी का मौका या अभी इंतजार?

मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि कीमतों में यह गिरावट ज्वेलरी खरीदारों के लिए अवसर बन सकती है। हालांकि निवेशकों को वैश्विक घटनाक्रम, डॉलर इंडेक्स और केंद्रीय बैंकों की नीतियों पर नजर बनाए रखनी चाहिए क्योंकि आने वाले दिनों में बाजार में और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

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