नई दिल्ली: सोने और चांदी की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव जारी है। 17 जुलाई को घरेलू बाजार में सोने और चांदी के दामों में गिरावट दर्ज की गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, सोना 415 रुपये और चांदी 797 रुपये सस्ती हुई है। वहीं, पिछले एक हफ्ते में दोनों कीमती धातुओं की कीमतों में बड़ी गिरावट देखने को मिली है।
सोने के दाम में गिरावट
IBJA के अनुसार, 10 ग्राम 24 कैरेट सोने की कीमत 415 रुपये घटकर 1,41,264 रुपये पर पहुंच गई है। इससे पहले 16 जुलाई को सोने का भाव 1,41,679 रुपये प्रति 10 ग्राम था। पिछले सात दिनों में सोने की कीमत में 2,104 रुपये की गिरावट दर्ज की गई है। 10 जुलाई को 10 ग्राम सोने का भाव 1,43,368 रुपये था।
चांदी भी हुई सस्ती
चांदी की कीमतों में भी गिरावट जारी रही। एक किलो चांदी का भाव 797 रुपये घटकर 2,16,637 रुपये पर आ गया है। इससे पहले 16 जुलाई को चांदी 2,17,434 रुपये प्रति किलो थी। एक हफ्ते में चांदी की कीमत में 3,753 रुपये की कमी आई है। 10 जुलाई को चांदी का भाव 2,20,390 रुपये प्रति किलो था।
इस साल कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव
साल 2025 के अंत से अब तक सोने और चांदी की कीमतों में काफी बदलाव देखने को मिला है। 31 दिसंबर 2025 को सोने का भाव करीब 1.33 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम था, जो 29 जनवरी को बढ़कर 1.76 लाख रुपये के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। इसके बाद से सोने की कीमत में करीब 34,857 रुपये की गिरावट आ चुकी है।
वहीं, चांदी 31 दिसंबर 2025 को करीब 2.30 लाख रुपये प्रति किलो थी, जो 29 जनवरी को बढ़कर 3.86 लाख रुपये के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गई थी। इसके बाद से चांदी की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है।
सोने-चांदी पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी
केंद्र सरकार ने सोने और चांदी के आयात पर लगने वाली ड्यूटी में बदलाव किया है। इंपोर्ट ड्यूटी को 6 फीसदी से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया गया है सरकार का कहना है कि, इस कदम का उद्देश्य विदेशी खरीद को कम करना और देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव घटाना है।
सरकार ने सोने पर:
10% बेसिक कस्टम ड्यूटी ,5% एग्रीकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर एंड डेवलपमेंट सेस (AIDC) लगाया है, जिससे कुल प्रभावी टैक्स 15% हो गया है। इससे पहले 2024 के बजट में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोने पर इंपोर्ट ड्यूटी को 15% से घटाकर 6% किया था।
आगे कैसी रह सकती है कीमत?
सोने और चांदी की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की स्थिति, महंगाई, ब्याज दरों और वैश्विक घटनाओं के आधार पर बदलती रहती हैं। ऐसे में निवेशकों और ग्राहकों की नजर अब आने वाले दिनों में कीमतों की चाल पर बनी हुई है।

