नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और डिजिटल कंपनियों के लिए नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब किसी भी आपत्तिजनक, गैर-कानूनी, डीपफेक या भ्रामक कंटेंट की शिकायत मिलने के सिर्फ 3 घंटे के भीतर उसे हटाना अनिवार्य होगा। पहले कंपनियों को कार्रवाई के लिए 24 से 36 घंटे तक का समय मिलता था, लेकिन अब डिजिटल युग में तेजी से फैलने वाले फर्जी कंटेंट को देखते हुए सरकार ने यह समयसीमा काफी कम कर दी है।
सरकार का कहना है कि डीपफेक वीडियो, फेक न्यूज और एआई से तैयार किए गए भ्रामक कंटेंट कुछ ही मिनटों में लाखों लोगों तक पहुंच जाते हैं, जिससे किसी व्यक्ति की छवि, सामाजिक सौहार्द और राष्ट्रीय सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे मामलों में अब सोशल मीडिया कंपनियों को तत्काल कार्रवाई करनी होगी।
बता दें नए नियमों के तहत डीपफेक वीडियो, फर्जी फोटो, बच्चों से जुड़ी आपत्तिजनक सामग्री (CSAM), बिना अनुमति साझा की गई निजी या अश्लील सामग्री और देश की सुरक्षा व कानून-व्यवस्था को प्रभावित करने वाली भ्रामक पोस्ट को प्राथमिकता के आधार पर हटाना होगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई प्लेटफॉर्म तय समयसीमा का पालन नहीं करता है, तो उसे आईटी एक्ट की धारा 79 के तहत मिलने वाला ‘सेफ हार्बर’ संरक्षण नहीं मिलेगा। इसके बाद संबंधित प्लेटफॉर्म को सीधे कानूनी और आपराधिक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
सरकार का मानना है कि यह कदम डिजिटल प्लेटफॉर्म्स की जवाबदेही बढ़ाएगा, फर्जी खबरों पर लगाम लगाएगा और इंटरनेट को अधिक सुरक्षित बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

