गुजरात। AAP ने गुजरात इकाई के इंस्टाग्राम हैंडल @aapgujarat और फेसबुक पेज को सस्पेंड किए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति आलोक अराधे की पीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया। अदालत ने इस याचिका को सोशल मीडिया अकाउंट और पोस्ट ब्लॉक करने से जुड़े समान मुद्दों वाली अन्य याचिकाओं के साथ टैग कर दिया।
जानकारी अनुसार, कोर्ट ने मामले को ‘Software Freedom Law Center, India बनाम Union of India’ जनहित याचिका के साथ जोड़ा है। इस PIL में बिना नोटिस दिए सोशल मीडिया अकाउंट या पोस्ट ब्लॉक किए जाने की प्रक्रिया को चुनौती दी गई है।
क्या है AAP की दलील ?
बता दें AAP की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता शादान फरासत ने अदालत में कहा कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79(3)(b) अधिकारियों को कंटेंट ब्लॉक करने की शक्ति नहीं देती। उन्होंने कहा कि यह प्रावधान केवल सेफ हार्बर सुरक्षा से संबंधित है, जो इंटरमीडियरी प्लेटफॉर्म पर लागू होती है।
जिसके बाद उन्होंने अदालत से कहा कि मौजूदा मामला अत्यंत जरूरी है क्योंकि पार्टी का सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फिलहाल बंद है और चुनावी व राजनीतिक गतिविधियों के लिए तत्काल पोस्ट करने की आवश्यकता पड़ सकती है।
केंद्र का पक्ष
वहीं केंद्र का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र को औपचारिक नोटिस जारी करने की आवश्यकता नहीं है और याचिका की प्रति उन्हें उपलब्ध करा दी जाए।
याचिका में क्या मांगें?
AAP ने अपनी याचिका में कहा है कि गुजरात इकाई के इंस्टाग्राम और फेसबुक अकाउंट को ब्लॉक या सस्पेंड करने का कानूनी आधार स्पष्ट नहीं है। धारा 79(3)(b) को ब्लॉकिंग का स्रोत नहीं माना जा सकता। अदालत संबंधित रिकॉर्ड तलब करे, जिनके आधार पर Meta को कार्रवाई के निर्देश दिए गए। पार्टी ने यह भी मांग की है कि अदालत राजनीतिक दलों के आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट को ब्लॉक या सस्पेंड करने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश और प्रक्रिया तय करे।
साथ ही याचिका में कहा गया है कि किसी भी राजनीतिक दल के सोशल मीडिया अकाउंट पर कार्रवाई से पहले पूर्व नोटिस दिया जाए और सुनवाई का अवसर मिले। लिखित कारण बताए जाएं और कार्रवाई केवल संविधान के अनुच्छेद 19(2) तथा IT Act की धारा 69A के अनुरूप ही हो।
क्या कहती है धारा 69A?
सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A सरकार को सीमित परिस्थितियों में ऑनलाइन सामग्री ब्लॉक करने का अधिकार देती है। इनमें भारत की संप्रभुता और अखंडत, देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, विदेशी देशों से संबंध, संज्ञेय अपराध के लिए उकसावे को रोकने जैसे आधार शामिल हैं।

