गुलमर्ग। जम्मू-कश्मीर के मशहूर पर्यटन स्थल गुलमर्ग में सोमवार को उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब दुनिया के सबसे ऊंचे रोपवे प्रोजेक्ट्स में शामिल गुलमर्ग गोंडोला अचानक तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। रोपवे सिस्टम के बीच रास्ते में रुक जाने से करीब 300 पर्यटक हवा में ही फंस गए।
घटना के तुरंत बाद भारतीय सेना, जम्मू-कश्मीर पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। शुरुआती जानकारी के अनुसार कुल 65 केबिन बीच हवा में रुक गए थे। इनमें महिलाएं, बच्चे और बुजुर्ग पर्यटक भी मौजूद थे।
सेना ने शुरू किया हाई-रिस्क रेस्क्यू ऑपरेशन
जानकारी अनुसार, भारतीय सेना की चिनार कॉर्प्स और नॉर्दर्न कमांड की विशेष टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत-बचाव अभियान शुरू किया। अब तक 16 केबिनों से करीब 80 पर्यटकों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है, जबकि बाकी लोगों को निकालने का अभियान लगातार जारी है।
सेना ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जानकारी देते हुए कहा कि प्रशिक्षित रेस्क्यू टीमें अत्यंत सावधानी के साथ ऑपरेशन को अंजाम दे रही हैं।
अचानक रुक गई गंडोला सेवा
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, गंडोला अचानक झटके के साथ रुक गया, जिसके बाद केबिनों में बैठे पर्यटक घबरा गए। कई पर्यटक मोबाइल फोन से मदद मांगते दिखाई दिए।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में हवा में लटके केबिन और नीचे राहत कार्य में जुटी टीमें दिखाई दे रही हैं। कुछ केबिन काफी ऊंचाई पर फंसे हुए थे, जिससे ऑपरेशन और चुनौतीपूर्ण हो गया।
तकनीकी खराबी बनी वजह
वहीं अधिकारियों के अनुसार प्राथमिक जांच में तकनीकी खराबी सामने आई है। रोपवे सिस्टम में अचानक आई दिक्कत के कारण केबल कार सेवा रोकनी पड़ी। तकनीकी विशेषज्ञों की टीम पूरे सिस्टम की जांच कर रही है ताकि जल्द से जल्द सेवा दोबारा शुरू की जा सके। प्रशासन का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है और सभी जरूरी सुरक्षा उपाय अपनाए जा रहे हैं।
पर्यटन सीजन में बड़ा झटका
बता दें गुलमर्ग गंडोला कश्मीर आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण माना जाता है। गर्मियों और बर्फबारी के मौसम में हजारों पर्यटक रोज इस रोपवे का आनंद लेने पहुंचते हैं। यह गंडोला समुद्र तल से करीब 13,000 फीट की ऊंचाई तक पर्यटकों को ले जाता है और दुनिया की सबसे ऊंची केबल कार परियोजनाओं में गिना जाता है।
प्रशासन अलर्ट मोड पर
स्थानीय प्रशासन ने पर्यटकों से अफवाहों पर ध्यान न देने की अपील की है। साथ ही घटना की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा होने के बाद तकनीकी ऑडिट किया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।

