सना/रियाद: मध्य-पूर्व में तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। अमेरिका-ईरान विवाद के बाद अब सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच मिसाइल और ड्रोन हमलों का सिलसिला तेज हो गया है। ताजा हमलों में हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के जिजान और यानबू जैसे रणनीतिक शहरों को निशाना बनाया। इनमें दुनिया की सबसे बड़ी तेल कंपनी अरामको से जुड़े महत्वपूर्ण तेल प्रतिष्ठान भी शामिल बताए जा रहे हैं। हमलों के बाद कई इलाकों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई और सुरक्षा एजेंसियां हाई अलर्ट पर आ गईं।
सूत्रों के मुताबिक, हमलों के बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने राष्ट्रीय आपातकालीन प्रारंभिक चेतावनी प्रणाली के तहत नागरिकों और प्रवासियों के लिए एडवाइजरी जारी की। लोगों से कहा गया कि यदि मोबाइल पर चेतावनी संदेश मिले तो घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत किसी सुरक्षित इमारत के अंदर जाएं और खिड़कियों, बालकनी तथा खुले स्थानों से दूर रहें। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि खतरा समाप्त होने की आधिकारिक सूचना मिलने तक सुरक्षित स्थान पर ही रहें।
यानबू, जो लाल सागर तट पर स्थित सऊदी अरब का प्रमुख औद्योगिक और बंदरगाह शहर है, देश की ऊर्जा और व्यापारिक गतिविधियों का अहम केंद्र माना जाता है। वहीं जिजान भी रणनीतिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण है। इन क्षेत्रों पर बढ़ते खतरे ने सऊदी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
दूसरी ओर, सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यमन के हुदैदाह में हूती विद्रोहियों के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। गठबंधन का कहना है कि यह कार्रवाई लाल सागर में सऊदी से जुड़े जहाजों और तेल टैंकरों पर हुए हमलों के जवाब में की गई है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल मल्की ने इस सैन्य अभियान की पुष्टि की।
इसी सप्ताह हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में सऊदी अरब के खिलाफ नाकेबंदी की चेतावनी दी थी, जिसके बाद क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मौजूदा हालात ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर भी नई चिंताएं खड़ी कर दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष और बढ़ता है तो इसका असर केवल मध्य-पूर्व ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया की तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

