जबलपुर: भोपाल में स्पोर्ट्स कोटे के आर्म्स लाइसेंसों की जांच के नाम पर चल रही कार्रवाई पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। हाईकोर्ट जबलपुर ने भोपाल कलेक्टर द्वारा एक स्पोर्ट्स आर्म्स लाइसेंस निरस्त करने के आदेश को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। यह पहला मौका है जब जिले में स्पोर्ट्स कैटेगरी के लाइसेंस निरस्तीकरण के खिलाफ हाईकोर्ट ने दखल देकर राहत दी है।
माननीय न्यायमूर्ति मनिंदर सिंह भट्टी की एकलपीठ ने याचिका क्रमांक WP No. 40914/2026 पर सुनवाई करते हुए यह अहम फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता पूर्व पार्षद मोहम्मद सऊद की ओर से अधिवक्ता विशाल विन्सेंट राजेंद्र डेनियल और अधिवक्ता अजहर हसन खान ने प्रभावी पैरवी की।
क्या है पूरा मामला?
पूर्व पार्षद मोहम्मद सऊद को वर्ष 2012 में आत्मरक्षा के लिए .30-06 बोर राइफल का लाइसेंस मिला था। बाद में नेशनल और स्टेट लेवल के निशानेबाज होने के कारण उन्हें शासन के आदेश पर .32 बोर पिस्टल और स्पोर्ट्स कोटे के तहत कारतूस का कोटा स्वीकृत किया गया।
2025-26 में भोपाल जिले में स्पोर्ट्स कोटे के लाइसेंसों की जांच के लिए संयुक्त जांच दल गठित किया गया था। इस दल की रिपोर्ट पर कलेक्टर भोपाल ने 18 मार्च 2026 को लाइसेंस को स्पोर्ट्स से आत्मरक्षा श्रेणी में बदलते हुए प्रकरण को नस्तीबद्ध कर दिया था।
लेकिन 2 अप्रैल 2026 को उसी जांच दल ने संशोधित रिपोर्ट देकर याचिकाकर्ता को 2017 के बाद प्रतियोगिता में भाग न लेने के कारण ‘निष्क्रिय शूटर’ बता दिया। इसी रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर ने बिना कोई नोटिस और सुनवाई का मौका दिए, अपना ही पुराना आदेश पलटते हुए पूरा लाइसेंस निरस्त कर 30 दिन में हथियार बेचने का आदेश जारी कर दिया।
कोर्ट में क्या दलीलें दी गईं?
याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने कोर्ट में तर्क दिया कि 18 मार्च को अंतिम आदेश पारित कर फाइल बंद करने के बाद कलेक्टर का अधिकार समाप्त हो गया था। बंद फाइल को दोबारा खोलना कानूनन गलत है। साथ ही बिना नोटिस और सुनवाई के लाइसेंस निरस्त करना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन है। किसी खिलाड़ी का प्रतियोगिता न खेलना या NRAI के नियमों का हवाला देकर आर्म्स एक्ट 1959 की धारा 17 के तहत आत्मरक्षा का लाइसेंस निरस्त नहीं किया जा सकता।
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हाईकोर्ट का फैसला
दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने 2 अप्रैल 2026 के निरस्तीकरण आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि 18 मार्च 2026 का आदेश प्रभावी रहेगा, जिसमें लाइसेंस को आत्मरक्षा श्रेणी में बदला गया था। हालांकि कलेक्टर को 60 दिनों के भीतर पात्रता का परीक्षण कर विधि सम्मत नया निर्णय लेने की स्वतंत्रता दी गई है। याचिकाकर्ता को 26 अक्टूबर 2026 को कलेक्टर के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं।


