भोपाल: राजधानी की शत्रु संपत्तियों ‘रियाज मंजिल’ और कोहेफिजा स्थित इससे जुड़ी संपत्तियों की बेदखली फिलहाल टल गई है। करीब 8 हेक्टेयर जमीन की कीमत जिला प्रशासन ने लगभग 95 करोड़ रुपए आंकी है। हाईकोर्ट ने संबंधित याचिकाओं का निराकरण करते हुए याचिकाकर्ताओं को केंद्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। साथ ही, फैसला होने तक 16 सितंबर 2026 को जारी बेदखली नोटिस के आधार पर कार्रवाई स्थगित रखने का निर्देश दिया है।
जस्टिस मनिंदर एस. भट्टी की एकलपीठ ने याचिकाकर्ताओं को शत्रु संपत्ति अधिनियम, 1968 की धारा 18 के तहत 15 दिन के भीतर केंद्र सरकार के संयुक्त सचिव या सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अभ्यावेदन प्रस्तुत करने की छूट दी है। निर्धारित अवधि में आवेदन मिलने पर प्राधिकारी को दोनों पक्षों की सुनवाई कर 60 दिन के भीतर तर्कसंगत निर्णय लेना होगा। तब तक उप-विभागीय अधिकारी (एसडीओ) की बेदखली संबंधी कार्यवाही स्थगित रहेगी और याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी।
बिना सुनवाई प्रमाणपत्र जारी करने का आरोप
याचिकाकर्ता आजम हसन खान ने तहसील हुजूर के ग्राम कोहेफिजा स्थित खसरा नंबर 42/19/1 (0.5240 हेक्टेयर) और 42/19/2 (0.0830 हेक्टेयर) के संबंध में जारी बेदखली नोटिस को चुनौती दी थी। ये नोटिस केस नंबर 1367/अ.वि.अ./2026 और 1369/अ.वि.अ./2026 के तहत जारी हुए थे। याचिका में 29 अप्रैल 2024 को शत्रु संपत्ति अधिनियम की धारा 12 के तहत जारी वेस्टिंग सर्टिफिकेट को भी चुनौती दी गई। याचिकाकर्ता का तर्क था कि प्रमाणपत्र जारी करते समय शत्रु संपत्ति नियम, 2015 के नियम 3 और 4 का पालन नहीं किया गया। उन्हें पूर्व नोटिस और सुनवाई का अवसर भी नहीं मिला। उन्होंने कब्जे में हस्तक्षेप और बुलडोजर कार्रवाई से संरक्षण मांगा था।
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प्रतिकूल फैसला आया तो भी 7 दिन तक कार्रवाई नहीं
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि सक्षम प्राधिकारी का फैसला याचिकाकर्ताओं के खिलाफ होने पर भी आदेश की सूचना मिलने के सात दिन तक उसे लागू नहीं किया जाएगा। इससे उन्हें आगे कानूनी राहत लेने का अवसर मिलेगा। अभ्यावेदन केवल समय-सीमा के आधार पर खारिज नहीं किया जा सकेगा। जिला प्रशासन के अधिकारियों के मुताबिक, प्रतिकूल निर्णय आने पर याचिकाकर्ता सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर कर सकते हैं। आगे की कार्रवाई न्यायालय के आदेश पर निर्भर करेगी। कानूनी राहत नहीं मिलने की स्थिति में संबंधित शत्रु संपत्तियों को नीलामी प्रक्रिया में शामिल किया जा सकता है।

