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हाइड्रोजन ट्रेन की बढ़ेगी रफ्तार, 120 KM की स्पीड का टेस्ट पास, वंदे भारत को देगी टक्कर?

Hydrogen Train: भारतीय रेलवे लगातार ट्रेनों को तेज और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर काम कर रहा है। इसी कड़ी में देश की हाइड्रोजन ट्रेन की रफ्तार बढ़ाने की तैयारी है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चल रही इस ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार का ट्रायल सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब इसे नियमित तौर पर पहले से ज्यादा रफ्तार से चलाने की तैयारी की जा रही है।

अब 75 की जगह 110 KM की रफ्तार

फिलहाल हाइड्रोजन ट्रेन करीब 75 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चल रही है। रेलवे की योजना इसकी रफ्तार बढ़ाकर करीब 110 किलोमीटर प्रति घंटे करने की है। ट्रायल के दौरान ट्रेन ने 120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति हासिल की है।

इससे यात्रियों को कम समय में सफर पूरा करने की सुविधा मिलेगी। साथ ही रेलवे को इस तकनीक को देश के दूसरे रूटों पर इस्तेमाल करने में भी मदद मिल सकती है।

89 किलोमीटर के रूट पर चल रही ट्रेन

हाइड्रोजन ट्रेन फिलहाल हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चल रही है। करीब 89 किलोमीटर लंबे इस रूट पर रफ्तार बढ़ने के बाद यात्रा का समय कम होगा। इससे यात्रियों के लिए ट्रेन ज्यादा सुविधाजनक हो सकती है और इसकी मांग बढ़ने की उम्मीद है।

रेलवे का उद्देश्य हाइड्रोजन तकनीक के जरिए प्रदूषण कम करना और ईंधन की खपत को घटाना भी है।

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बिना डीजल और बिजली के कैसे चलती है?

हाइड्रोजन ट्रेन की सबसे खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए डीजल इंजन या ओवरहेड बिजली के तारों की जरूरत नहीं होती। ट्रेन में लगे हाइड्रोजन फ्यूल सेल हाइड्रोजन और हवा में मौजूद ऑक्सीजन के बीच रासायनिक प्रक्रिया के जरिए बिजली बनाते हैं।

इस प्रक्रिया में मुख्य उप-उत्पाद के तौर पर पानी निकलता है। यही वजह है कि हाइड्रोजन ट्रेन को पर्यावरण के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जाता है। इसमें पारंपरिक डीजल ट्रेन की तरह धुएं का उत्सर्जन नहीं होता।

क्या वंदे भारत को टक्कर देगी?

वंदे भारत ट्रेन की अधिकतम डिजाइन स्पीड करीब 180 किलोमीटर प्रति घंटे है, हालांकि अलग-अलग रूट और परिचालन परिस्थितियों में इसकी वास्तविक औसत गति इससे काफी कम रहती है।

हाइड्रोजन ट्रेन अभी वंदे भारत की रफ्तार तक नहीं पहुंची है, लेकिन 110-120 किलोमीटर प्रति घंटे की गति इसे तेज ट्रेनों की श्रेणी में जरूर ला सकती है। इसका असली फायदा इसकी ग्रीन तकनीक और बिना विद्युतीकरण वाले रूट पर चलने की क्षमता में है।

आने वाले समय में अगर हाइड्रोजन ट्रेनों की रफ्तार और तकनीक में सुधार होता है, तो रेलवे इन्हें देश के कई दूसरे रूटों पर भी इस्तेमाल कर सकता है।

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