भोपाल। मप्र में शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) को लेकर चल रहा विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश को चुनौती देने वाली पुनर्विचार याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट कल बुधवार को ओपन कोर्ट में सुनवाई करेगा। अदालत ने मध्यप्रदेश सरकार की रिव्यू पिटीशन स्वीकार करते हुए मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है। मामले की सुनवाई जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस मनमोहन की खंडपीठ करेगी। संभावना है कि प्रदेश के विभिन्न शिक्षक संगठनों द्वारा दायर याचिकाओं पर भी एक साथ सुनवाई हो सकती है।
दरअसल, स्कूल शिक्षा विभाग ने सुप्रीम कोर्ट के 1 सितंबर 2025 के आदेश के आधार पर वर्ष 1998 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा आयोजित कराने के निर्देश जारी किए थे। ये वे शिक्षक हैं जिनकी नियुक्ति राज्य सरकार की मेरिट प्रक्रिया के तहत हुई थी और जिन्होंने शिक्षक पात्रता परीक्षा नहीं दी थी। प्रदेश में ऐसे शिक्षकों की संख्या करीब डेढ़ लाख बताई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने पूर्व आदेश में कहा था कि जो शिक्षक पात्रता परीक्षा में सफल नहीं होंगे, उन्हें सेवा से पृथक किया जाएगा। इसके बाद आयुक्त लोक शिक्षण कार्यालय द्वारा आदेश जारी होते ही प्रदेशभर में शिक्षकों और कर्मचारी संगठनों ने विरोध शुरू कर दिया था।
शिक्षक संगठनों ने भी दायर की हैं याचिकाएं
बता दें कि पिछले महीने शासकीय शिक्षक संगठन, राज्य कर्मचारी संघ समेत कई संगठनों और मध्यप्रदेश सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिकाएं दायर की गई थीं। जानकारी के मुताबिक सभी रिव्यू पिटीशन को एक साथ सूचीबद्ध किया गया है। खास बात यह है कि सामान्यतः रिव्यू पिटीशन जजों के चेंबर में सुनी जाती हैं, लेकिन इस मामले में सुनवाई ओपन कोर्ट में होगी। इससे शिक्षक संगठनों के वकीलों को सीधे बहस करने का अवसर मिलेगा।

