इंदौर: भागीरथपुरा दूषित पानी कांड से जुड़ी जांच रिपोर्ट अब सार्वजनिक कर दी गई है। हाई कोर्ट के निर्देश के बाद रिपोर्ट को कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद क्षेत्र की पानी सप्लाई और सीवेज व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं? खास तौर पर पाइपलाइन बदलने के लिए टेंडर जारी होने के बावजूद काम आगे नहीं बढ़ने का मामला सामने आया है।
दिसंबर 2025 में भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी के कारण गंभीर स्वास्थ्य संकट सामने आया था। इस घटना में 36 लोगों की मौत होने का दावा किया गया था। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए आयोग का गठन किया गया। आयोग ने अपनी रिपोर्ट 25 अगस्त को हाई कोर्ट में पेश की थी।
पानी और सीवेज लाइन की व्यवस्था पर सवाल?
जांच रिपोर्ट के मुताबिक भागीरथपुरा क्षेत्र में कई जगह सीवेज लाइन और पानी की पाइपलाइन लंबे समय से एक-दूसरे के साथ गुजर रही थीं। पानी की पाइपलाइन की स्थिति भी खराब बताई गई है। ऐसे में दूषित पानी की समस्या को लेकर पहले से मौजूद व्यवस्था और उसकी निगरानी पर सवाल उठाए गए हैं।
रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि पानी की पुरानी पाइपलाइन बदलने के लिए पहले टेंडर जारी किए गए थे, लेकिन इसके बाद प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। पाइपलाइन बदलने का काम लंबित रहा।
अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग
मामले के याचिकाकर्ता अधिवक्ता रितेश ईनाणी का आरोप है कि अधिकारियों की लापरवाही और उदासीनता के कारण पाइपलाइन बदलने का काम समय पर नहीं हुआ। उनका कहना है कि अगर समय रहते व्यवस्था में सुधार किया जाता तो हालात अलग हो सकते थे।
हालांकि, जांच रिपोर्ट में फिलहाल किसी अधिकारी या जनप्रतिनिधि को सीधे तौर पर दोषी ठहराने या क्लीन चिट देने की बात सामने नहीं आई है। रिपोर्ट में उस समय जिम्मेदारी संभाल रहे अधिकारियों की कार्यशैली और व्यवस्था में रही कमियों का उल्लेख जरूर किया गया है।
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अब कोर्ट से कार्रवाई की मांग करेंगे याचिकाकर्ता
रिपोर्ट सार्वजनिक होने के बाद अब मामले में जिम्मेदारी तय करने की मांग तेज हो सकती है। याचिकाकर्ता की ओर से कोर्ट के सामने यह मांग रखी जाएगी कि जिन अधिकारियों के स्तर पर पाइपलाइन से जुड़ी फाइलें लंबित रहीं या जिनके पास पानी और सीवेज व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी थी, उनकी भूमिका की जांच कर उचित कानूनी कार्रवाई की जाए।
अब सभी की नजर आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया पर है। जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह तय होना बाकी है कि भागीरथपुरा की पानी और सीवेज व्यवस्था में हुई लापरवाही के लिए किस स्तर पर जिम्मेदारी तय की जाती है और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई होती है।

