उज्जैन: मध्यप्रदेश के उज्जैन में विकास के लिए 170 साल पुराना हनुमान मंदिर हटाया जा रहा है…हांलाकि पुरातत्व विभाग ने मूर्ति को हटाना बहुत बड़ी रिस्क बताया है,वहीं भक्तों का कहना है प्रशासन बाबा की मूर्ति हटाने के पहले लिखित गारंटी दे कि इससे प्रतिमा को कोई नुकसान नहीं होगा
1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का साक्षी रहा यह मंदिर
धार्मिक नगरी उज्जैन के कंठाल से छत्री चौक तक जब सड़क चौड़ीकरण की कुल्हाड़ी चली, तो शहर के सबसे प्राचीन खड़े हनुमान मंदिर का ठिकाना बदलने की बारी आ गई: सन् 1857 के प्रथम स्वाधीनता संग्राम का साक्षी रहा यह मंदिर केवल पत्थरों का ढांचा नहीं, बल्कि पीढ़ियों का विश्वास था। जहाँ पाँच पीढ़ियों से सेवा कर रहे परिवार और हर गुजरते श्रद्धालु की आँखें आज विदाई के इस पल में नम हैं।
हिंदूवादी संगठनों ने मांगी प्रतिमा के खंडित न होने की गारंटी
आपको बता दें सवाल सिर्फ विस्थापन का नहीं, बजरंगबली की प्रतिमा की सुरक्षा का भी है!पुरातत्व विभाग की जांच के बाद यह आशंका जताई गई है कि प्रतिमा को हिलाने से उसमें क्रैक आ सकते हैं और वह खंडित हो सकती है। मंदिर के पुजारी महेश पंडित और स्थानीय हिंदूवादी संगठनों ने प्रशासन से स्पष्ट और लिखित गारंटी मांगी है—अगर प्रतिमा को जरा सा भी नुकसान पहुँचा, तो उसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी!

