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महाकाल कॉन्फ्रेंस के नाम पर लाखों के बिलों में गड़बड़ी, ई-रिक्शा को इनोवा और मोपेड को ट्रैवलर बताकर लिया भुगतान

भोपाल: मध्य प्रदेश के उज्जैन में अप्रैल 2026 में आयोजित ‘महाकाल: द मास्टर ऑफ टाइम’ कॉन्फ्रेंस के खर्चों को लेकर बड़ा मामला सामने आया है। मध्य प्रदेश विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी परिषद (मेपकास्ट) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में किराए पर ली गई गाड़ियों के बिलों में गंभीर गड़बड़ियां मिलने का दावा किया गया है। जिन गाड़ियों को इनोवा और ट्रैवलर बताकर भुगतान किया गया, उनके रजिस्ट्रेशन नंबर मोपेड, ई-रिक्शा, वैन और ट्रक के निकले।

रिपोर्ट के मुताबिक, गाड़ियों के किराए के नाम पर 57 लाख रुपए से अधिक का भुगतान किया गया। हैरानी की बात यह है कि एक मोपेड को 24 घंटे में 38 घंटे चलते हुए दिखाया गया, जबकि एक गाड़ी की मीटर रीडिंग महज 25 घंटे में 22,708 किलोमीटर बढ़ गई।

ट्रैवलर के नाम पर भेजा बिल, नंबर निकला खराब मोपेड का

कॉन्फ्रेंस के लिए भोपाल की अदिति टूर एंड ट्रैवल्स से गाड़ियां किराए पर ली गई थीं। बिलों की जांच में कई ऐसे नंबर मिले, जिनका वास्तविक वाहनों से कोई मेल नहीं था। बिल नंबर 3054 में UP65-ED1523 नंबर की गाड़ी को ट्रैवलर बताया गया। इसके लिए 1 अप्रैल को उज्जैन में 186 किलोमीटर चलने के नाम पर 29,242 रुपए का भुगतान किया गया।

लेकिन पड़ताल में यह नंबर उत्तर प्रदेश के शुभम जायसवाल की मोपेड का निकला। रिपोर्ट के अनुसार, शुभम ने बताया कि उनकी मोपेड पिछले दो महीने से खराब थी और वाराणसी के एक वर्कशॉप में खड़ी थी।

ई-रिक्शा को इनोवा बताकर बनाई गई बिलिंग

एक अन्य बिल नंबर 3061 में MP13-ZP4512 नंबर की गाड़ी को इनोवा बताकर 2 से 5 अप्रैल तक बुक दिखाया गया। जांच में सामने आया कि यह नंबर उज्जैन में रितेश श्रीवास्तव के नाम पर रजिस्टर्ड ई-रिक्शा का है।

इसी तरह 3 अप्रैल को बिल नंबर 3060 और 3061 में MP11-P0671 नंबर की 26 सीटर ट्रैवलर की दो बार बिलिंग की गई। दोनों बिलों में 10-10 घंटे की अतिरिक्त ड्यूटी भी जोड़ दी गई। रिपोर्ट के अनुसार, एक ही दिन में एक ही गाड़ी के नाम पर तैयार दोनों बिलों को मंजूरी मिल गई।

कॉन्फ्रेंस पर कुल 6.29 करोड़ रुपए खर्च

महाकाल कॉन्फ्रेंस के आयोजन पर कुल 6.29 करोड़ रुपए खर्च किए गए। इसमें टेंट, लाइट, साउंड, प्रोजेक्शन, प्रचार-प्रसार, कैटरिंग और अन्य व्यवस्थाएं शामिल थीं। दस्तावेजों के अनुसार, आयोजन से जुड़े कार्यों के लिए सुविधा इंटरप्राइजेज को 4.18 करोड़ रुपए और मेसर्स प्रो. इवेंट को 22.12 लाख रुपए का भुगतान किया गया।

वहीं, वीर भारत न्यास ने 12.82 लाख रुपए हैंडलिंग चार्ज के रूप में लिए। कार्यक्रम में भोजन व्यवस्था के लिए भोपाल की नर्मदा कैटर्स को जिम्मेदारी दी गई थी, जिस पर 1.32 करोड़ रुपए खर्च हुए।

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भुगतान से पहले बिलों की जांच पर उठे सवाल?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि लाखों रुपए के भुगतान से पहले गाड़ियों के रजिस्ट्रेशन नंबर और उनकी वास्तविक जानकारी की जांच क्यों नहीं की गई। यदि बिलों में दर्ज गाड़ियां वास्तव में दूसरी श्रेणी की थीं, तो उनकी बुकिंग और भुगतान को मंजूरी कैसे मिली?

एक ही गाड़ी के नाम पर दो बार बिलिंग और असंभव समय तथा दूरी दर्ज होने के आरोपों ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है।

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