खैरलांजी: गरीब और जरूरतमंद विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए आवास की सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से संचालित राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय महाविद्यालयीन बालक छात्रावास, खैरलांजी को बंद किए जाने का मामला सामने आने के बाद विद्यार्थियों और ग्रामीणों में नाराजगी है। छात्रावास में 22 अक्टूबर को ताला लगाए जाने से दूर-दराज के गांवों से पढ़ाई करने आए विद्यार्थियों के सामने रहने और शिक्षा जारी रखने की समस्या खड़ी हो गई। वहीं, छात्रावास में लगभग 43 विद्यार्थियों के प्रवेश के बावजूद रिकॉर्ड में केवल 19 नाम दर्शाए जाने के आरोप ने पूरे मामले पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
22 अक्टूबर को छात्रावास में लगा ताला, विद्यार्थियों के सामने रहने का संकट
जानकारी के अनुसार, खैरलांजी और कटंगी क्षेत्र के दूरस्थ ग्रामीण इलाकों से बड़ी संख्या में विद्यार्थी वीरांगना रानी अवंतीबाई शासकीय महाविद्यालय, खैरलांजी में पढ़ाई करने आते हैं। इनमें कई विद्यार्थी आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से हैं, जिनके लिए प्रतिदिन गांव से महाविद्यालय आना-जाना संभव नहीं है। ऐसे विद्यार्थियों के लिए शासकीय छात्रावास ही उच्च शिक्षा प्राप्त करने का प्रमुख सहारा है।
विद्यार्थियों का कहना है कि 22 अक्टूबर को छात्रावास में ताला लगा दिया गया। जब वे छात्रावास पहुंचे तो अधीक्षक की ओर से उन्हें छात्रावास बंद किए जाने की जानकारी दी गई। अचानक हुए इस घटनाक्रम से विद्यार्थियों की परेशानी बढ़ गई। छात्रों के सामने सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया कि अब वे कहां रहेंगे और अपनी पढ़ाई कैसे जारी रखेंगे।
सहायक आयुक्त तक पहुंचा मामला, शिकायत के बाद खुला ताला
छात्रावास बंद होने से परेशान विद्यार्थियों ने 24 अक्टूबर को जनजातीय कार्य विभाग की सहायक आयुक्त शकुंतला डामोर के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर अपनी समस्या बताई। इसके बाद उसी दिन शाम को छात्रावास का ताला खोलने की अनुमति दिए जाने की जानकारी सामने आई।
हालांकि, ताला खुलने के बाद भी विद्यार्थियों की चिंता पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। उनका कहना है कि छात्रावास को अस्थायी रूप से खोलना समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। विभाग को छात्रावास का नियमित संचालन सुनिश्चित करना चाहिए, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों को दोबारा ऐसी परेशानी का सामना न करना पड़े।
43 विद्यार्थियों के प्रवेश, लेकिन रिकॉर्ड में केवल 19 नाम क्यों?
इस पूरे मामले में सबसे गंभीर सवाल छात्रावास में दर्ज विद्यार्थियों की संख्या को लेकर उठ रहा है। भारत चौरागड़े ने आरोप लगाया है कि छात्रावास में लगभग 43 विद्यार्थियों का प्रवेश था, लेकिन छात्रावास अधीक्षक द्वारा विद्यार्थियों के नाम काटकर संख्या घटाते हुए केवल 19 दर्शाई गई।
इस आरोप के सामने आने के बाद छात्रावास की प्रवेश प्रक्रिया और विद्यार्थियों के रिकॉर्ड को लेकर सवाल उठने लगे हैं। विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि कहीं कम संख्या दर्शाकर छात्रावास को बंद करने का आधार तैयार करने का प्रयास तो नहीं किया गया।
हालांकि, विद्यार्थियों के नाम काटे जाने और संख्या कम दर्शाने के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। ऐसे में विभागीय स्तर पर प्रवेश रजिस्टर और संबंधित अभिलेखों की निष्पक्ष जांच आवश्यक मानी जा रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितने विद्यार्थियों का प्रवेश हुआ था और रिकॉर्ड में संख्या कम होने का कारण क्या है।
आगामी सत्र में पीजी की पढ़ाई शुरू होने की संभावना
ग्रामीणों का कहना है कि आगामी शैक्षणिक सत्र में खैरलांजी महाविद्यालय में स्नातकोत्तर (पीजी) पाठ्यक्रम शुरू होने की संभावना है। यदि महाविद्यालय में पीजी की पढ़ाई शुरू होती है, तो आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले विद्यार्थियों की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है।
ऐसी स्थिति में छात्रावास की आवश्यकता कम होने के बजाय और बढ़ सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकार एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पहले से संचालित छात्रावास को बंद करने की स्थिति बनना चिंता का विषय है।
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गरीब विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़ा मामला, निष्पक्ष जांच की मांग
विद्यार्थियों और ग्रामीणों ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से मांग की है कि राजा शंकर शाह रघुनाथ शाह शासकीय महाविद्यालयीन बालक छात्रावास को किसी भी स्थिति में बंद न किया जाए। साथ ही छात्रावास में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों की वास्तविक संख्या, रिकॉर्ड से नाम हटाए जाने के आरोप और छात्रावास बंद करने के कारणों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि छात्रावास केवल रहने की व्यवस्था नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा तक पहुंचने का महत्वपूर्ण माध्यम है। यदि यह सुविधा बंद होती है, तो कई विद्यार्थियों को मजबूरी में अपनी पढ़ाई छोड़नी पड़ सकती है।

