महाराष्ट्र। राज्य के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने आज ऑटो-रिक्शा और टैक्सी यूनियनों के प्रतिनिधियों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक बुलाई है। इस बैठक का केंद्र बिंदु ड्राइवरों के लिए प्रस्तावित ‘Functional Marathi’ (कार्यात्मक मराठी) परीक्षा है, जिसे यात्री परिवहन परमिट से जोड़े जाने पर विचार किया जा रहा है।
क्या है प्रस्ताव और क्यों जरूरी?
इस मामले को लेकर सरकार का कहना है कि मराठी राज्य की आधिकारिक भाषा है और अधिकांश यात्री इसी में संवाद करते हैं। ऐसे में ड्राइवरों के लिए मराठी का कम से कम कार्यात्मक ज्ञान होना जरूरी है, ताकि यात्रियों से बेहतर संवाद स्थापित हो सके। इससे न केवल सेवा की गुणवत्ता सुधरेगी बल्कि प्रशासनिक प्रक्रियाएं भी अधिक सुगम और प्रभावी बनेंगी।
प्रशिक्षण सुविधा पर भी चर्चा
इस बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया है कि जो ड्राइवर मराठी नहीं जानते, उनके लिए सरकार प्रायोजित प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए जाएं। इन कार्यक्रमों के जरिए ड्राइवरों को बुनियादी मराठी सिखाई जाएगी, जिससे वे परीक्षा पास कर सकें और अपने परमिट सुरक्षित रख सकें।
यूनियनों का विरोध और चिंता
हालांकि, इस फैसले को लेकर कई ऑटो-टैक्सी यूनियनों ने विरोध जताया है। यूनियन नेताओं का कहना है कि भाषा को आधार बनाकर परमिट रद्द करना अन्यायपूर्ण और अवैध होगा। खासतौर पर उन रिपोर्ट्स पर सवाल उठाए गए हैं जिनमें कहा गया कि 2 मई से मराठी न जानने वाले ड्राइवरों के परमिट रद्द किए जा सकते हैं। यूनियनों ने सरकार से इस फैसले को वापस लेने की मांग की है।
बैठक में कौन-कौन शामिल?
बता दें इस बैठक में यूनियन प्रतिनिधियों के साथ शशांक राव और शिवसेना के पूर्व सांसद संजय निरुपम के शामिल होने की संभावना है। माना जा रहा है कि इस चर्चा के बाद सरकार कोई संतुलित और व्यावहारिक समाधान निकाल सकती है।

