नई दिल्ली/मुंबई। महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी भूचाल आ गया है। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख Uddhav Thackeray को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी के 9 में से 6 लोकसभा सांसदों के बागी होने की खबरें सामने आईं। सूत्रों के मुताबिक इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष Om Birla को पत्र भेजकर एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की इच्छा जताई है। हालांकि अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
बागी सांसदों में नागेश पाटिल आष्टीकर और संजय दीना पाटिल के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। दिलचस्प बात यह है कि संजय दीना पाटिल ने बुधवार सुबह तक पार्टी छोड़ने की खबरों का खंडन किया था। लेकिन दिन चढ़ते-चढ़ते राजनीतिक घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में भड़के संजय राउत
घटनाक्रम से नाराज राज्यसभा सांसद Sanjay Raut ने दिल्ली में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बागी सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये लोग बेईमान हैं और बेईमानी इनके खून में है। राउत की टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी। बाद में सफाई देते हुए उन्होंने कहा कि मराठी भाषा में ऐसे शब्द सामान्य बोलचाल का हिस्सा हैं।
चार साल में दूसरी बड़ी टूट
गौरतलब है कि शिवसेना में यह चार वर्षों के भीतर दूसरी बड़ी बगावत मानी जा रही है। जून 2022 में Eknath Shinde के नेतृत्व में 39 विधायकों ने विद्रोह कर अलग गुट बना लिया था, जिसके बाद महाराष्ट्र की राजनीति पूरी तरह बदल गई थी। अब सांसदों की बगावत ने उद्धव ठाकरे की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
विपक्षी दलों में लगातार टूट
पिछले तीन महीनों में विपक्षी खेमे के कई सांसद दल बदल चुके हैं। राजनीतिक सूत्रों के अनुसार कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस सहित विभिन्न विपक्षी दलों के 27 सांसदों ने पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाया है। इसी बीच उत्तर प्रदेश के मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी प्रमुख Om Prakash Rajbhar ने दावा किया है कि समाजवादी पार्टी में भी बड़ी टूट हो सकती है।
हालांकि सपा प्रमुख Akhilesh Yadav ने इन अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी पार्टी पूरी तरह एकजुट और मजबूत है।
भाजपा ने झाड़ा पल्ला
महाराष्ट्र सरकार में मंत्री Chandrashekhar Bawankule ने शिवसेना (यूबीटी) में टूट के लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहराने वाले आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि उद्धव ठाकरे को यह आत्ममंथन करना चाहिए कि उनके सांसद और विधायक लगातार उनका साथ क्यों छोड़ रहे हैं। यह पूरी तरह शिवसेना का आंतरिक मामला है।
दल-बदल कानून से बच सकते हैं बागी सांसद
लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के कुल 9 सांसद हैं। दल-बदल कानून के अनुसार यदि किसी दल के दो-तिहाई सदस्य एक साथ अलग होने का फैसला लेते हैं तो वे अयोग्यता से बच सकते हैं। ऐसे में 9 में से 6 सांसदों का एक साथ बगावत करना राजनीतिक और कानूनी दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गुट औपचारिक रूप से किसी दूसरे दल में विलय की प्रक्रिया पूरी कर लेता है तो उनकी स्थिति और मजबूत हो सकती है।
राउत का बड़ा आरोप- सांसदों को 50-50 करोड़ का ऑफर
संजय राउत ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में सनसनीखेज आरोप लगाते हुए दावा किया कि बागी सांसदों को 50-50 करोड़ रुपए का ऑफर दिया गया है। उन्होंने कहा कि कुछ सांसदों तक 15-15 करोड़ रुपए एडवांस पहुंचाए गए और उन्हें चार्टर्ड विमानों के जरिए दिल्ली लाया गया।
दिलचस्प बात यह रही कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी के 9 सांसदों में से केवल तीन सांसद—अनिल देसाई, राजाभाऊ वाजे और अरविंद सावंत—ही मौजूद थे। राउत ने बाकी सांसदों से सार्वजनिक रूप से सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
महाराष्ट्र की राजनीति में फिर बढ़ा सस्पेंस
शिवसेना (यूबीटी) के भीतर मची इस नई बगावत ने महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर सस्पेंस बढ़ा दिया है। अब सभी की नजर लोकसभा अध्यक्ष के अगले कदम और बागी सांसदों के आधिकारिक रुख पर टिकी हुई है। यदि यह टूट औपचारिक रूप लेती है तो उद्धव ठाकरे के लिए यह हाल के वर्षों का सबसे बड़ा राजनीतिक झटका साबित हो सकता है।

