New stock market rules: अगर आप शेयर बाजार में निवेश या ट्रेडिंग करते हैं तो आपके लिए आज यानी 7 सितंबर 2026 से कुछ अहम बदलाव लागू हो गए हैं। NSE ने प्री-ओपन सेशन, ETF की कीमत तय करने और प्राइस बैंड से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। खास तौर पर Gold ETF और Silver ETF में निवेश करने वालों के लिए इन बदलावों को समझना जरूरी है।
Pre-Open Session का समय और तरीका बदला
NSE के प्री-ओपन सेशन में अब ऑर्डर डालने की प्रक्रिया पहले से अलग होगी। सुबह 9 बजे से 9:05 बजे तक निवेशक मार्केट और लिमिट दोनों तरह के ऑर्डर डाल सकते हैं। इस दौरान ऑर्डर में बदलाव या उसे कैंसिल भी किया जा सकता है।
इसके बाद 9:05 बजे से 9:10 बजे तक केवल लिमिट ऑर्डर डालने, बदलने या कैंसिल करने की सुविधा रहेगी। इस अवधि में नए मार्केट ऑर्डर नहीं डाले जा सकेंगे।
इसके बाद 9:10 बजे से 9:12 बजे तक ऑर्डर का मिलान होगा और शेयर की शुरुआती कीमत तय की जाएगी। प्री-ओपन ऑर्डर एंट्री का अंत 9:08 से 9:10 बजे के बीच रैंडम तरीके से किया जा सकता है। इसका मकसद बाजार खुलने के समय कीमतों में अचानक होने वाले उतार-चढ़ाव को कम करना है।
Gold और Silver ETF भी Pre-Open में शामिल
आज से Gold ETF और Silver ETF को भी प्री-ओपन सेशन में शामिल किया गया है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतें भारतीय बाजार बंद रहने के दौरान भी बदलती रहती हैं। ऐसे में बाजार खुलने पर ETF की कीमत में अचानक बड़ा अंतर देखने को मिल सकता है।
नए नियम के तहत बाजार खुलने से पहले खरीद और बिक्री के ऑर्डर को एक साथ मिलाकर शुरुआती कीमत तय करने की कोशिश की जाएगी। इससे कीमत तय करने की प्रक्रिया ज्यादा व्यवस्थित हो सकती है।
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ETF का Price Band भी बदला
ETF के प्राइस बैंड को तय करने का तरीका भी बदल गया है। पहले इसके लिए कई मामलों में दो दिन पुरानी NAV का इस्तेमाल किया जाता था। अब पिछली ट्रेडिंग डेट के आखिरी 30 मिनट के VWAP को आधार बनाया जाएगा।
अगर उस दौरान कोई कारोबार नहीं हुआ तो आखिरी ट्रेडेड प्राइस और पूरे दिन कारोबार नहीं होने पर आखिरी क्लोजिंग NAV को आधार बनाया जाएगा।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
निवेशकों को खासकर Gold और Silver ETF में खरीदारी करते समय सिर्फ स्क्रीन पर दिखाई देने वाली कीमत पर भरोसा नहीं करना चाहिए। iNAV, ट्रेडिंग वॉल्यूम और बाजार की स्थिति भी देखनी चाहिए। तेजी या गिरावट के दौरान लिमिट ऑर्डर का इस्तेमाल करना ज्यादा सावधानी भरा तरीका हो सकता है।
कुल मिलाकर, नए नियमों का उद्देश्य बाजार में कीमत तय करने की प्रक्रिया को बेहतर और पारदर्शी बनाना है। हालांकि इन बदलावों से मुनाफे की कोई गारंटी नहीं है, इसलिए निवेशकों को सोच-समझकर ही कारोबार करना चाहिए।

