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अनिल अंबानी को हाई कोर्ट से बड़ी राहत: ₹420 करोड़ के ब्लैक-मनी केस में IT विभाग की दंडात्मक कार्रवाई पर रोक!

मुंबई| रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी के लिए देश की आर्थिक राजधानी से एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इनकम टैक्स (IT) डिपार्टमेंट को आदेश दिया है कि वे ब्लैक मनी एक्ट के तहत अनिल अंबानी के खिलाफ फिलहाल किसी भी तरह का कड़ा एक्शन या दंडात्मक कार्रवाई न करें। बता दें कि आईटी विभाग ने उन पर ₹420 करोड़ की भारी-भरकम टैक्स चोरी का आरोप लगाया है।

रिट याचिका स्वीकार, एक्शन पर लगी रोक

जस्टिस बी पी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदोष पूनीवाला की डिवीजन बेंच ने अनिल अंबानी द्वारा दायर की गई याचिका को अंतिम सुनवाई के लिए स्वीकार कर लिया है।

अदालत ने साफ किया है कि इनकम टैक्स कमिश्नर के सामने चल रही अपील प्रक्रिया जारी रह सकती है। लेकिन जब तक हाई कोर्ट इस रिट याचिका पर अपना अंतिम फैसला नहीं सुना देता, तब तक अंबानी के खिलाफ मुकदमा चलाने या जुर्माना लगाने जैसी कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी। कोर्ट ने यह भी नोट किया कि ब्लैक मनी एक्ट, 2015 के प्रावधानों को चुनौती देने वाली ऐसी ही कई अन्य याचिकाएं भी अदालत के सामने विचाराधीन हैं।

क्या हैं IT विभाग के आरोप?

इनकम टैक्स विभाग का दावा है कि अनिल अंबानी ने जानबूझकर भारतीय टैक्स अधिकारियों से अपने विदेशी बैंक खातों और वित्तीय हितों की जानकारी छुपाई है। विभाग के अनुसार, अंबानी के दो स्विस बैंक खातों में ₹814 करोड़ से ज्यादा का अघोषित फंड जमा था, जिस पर ₹420 करोड़ की टैक्स चोरी की गई।

वहीं आईटी विभाग के नोटिस के मुताबिक, अनिल अंबानी बहामास स्थित ‘डायमंड ट्रस्ट’ और ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड्स में रजिस्टर्ड कंपनी ‘नॉर्दर्न अटलांटिक ट्रेडिंग अनलिमिटेड’ (NATU) के ‘बेनिफिशियल ओनर’ और ‘इकोनॉमिक कंट्रीब्यूटर’ थे।

अंबानी की दलील

अनिल अंबानी की ओर से अदालत में उनके वकीलों ने एक बेहद मजबूत कानूनी तर्क पेश किया है। अंबानी का कहना है कि ब्लैक मनी एक्ट साल 2015 में लागू हुआ था। जबकि आईटी विभाग जिन ट्रांजैक्शन्स की जांच कर रहा है, वे असेसमेंट ईयर 2006-07 और 2010-11 से संबंधित हैं। कानून के मुताबिक, इस एक्ट के प्रावधानों को पिछली तारीख से लागू नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस एक्ट के कुछ प्रावधानों को भारतीय संविधान के खिलाफ भी बताया है, जिस पर हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

दोषी होने पर 10 साल जेल

अगर कोर्ट से यह राहत न मिलती और आरोप साबित हो जाते, तो अनिल अंबानी को एक बेहद कड़े कानून का सामना करना पड़ सकता था। ‘ब्लैक मनी एक्ट, 2015’ की इन धाराओं के तहत अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर अपने विदेशी खातों या संपत्तियों की जानकारी आईटी रिटर्न (ITR) में नहीं देता है, तो उसके खिलाफ क्रिमिनल केस चलाया जाता है।

इस कानून के तहत दोषी पाए जाने पर कम से कम 3 साल और अधिकतम 10 साल की कड़ी जेल की सजा के साथ-साथ भारी-भरकम जुर्माने का नियम है। फिलहाल, हाई कोर्ट के स्टे के बाद अनिल अंबानी ने बड़ी राहत की सांस ली है।

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