बालाघाट: जिले के मलाजखंड थानांतर्गत ग्राम लोरा में व्यापारी यशवंत गोयल के सूने मकान को चोरों ने अपना निशाना बनाया और लाखों के सोने-चांदी के जेवरात और नगदी लेकर फरार हो गए। जहां 07 लाख नगदी और सोने-चांदी के जेवरात सहित कुल 10 लाख से भी अधिक की चोरी की वारदात हुई। जिसे महीना बीत गया है, मगर अब तक मलाजखंड पुलिस चोरों तक नहीं पहुंच पाई है। फरियादी ने आरोप लगाते हुए कहा कि वे कई बार थाने गए, लेकिन पुलिस ने 07 लाख की रकम लिखने से साफ इनकार कर दिया। जिससे मलाजखंड पुलिस की गैरजिम्मेदारी उजागर हो रही है और पीड़ित मानसिक रूप से परेशान हो रहा है। अंत में पीड़ित ने 181 में शिकायत करते हुए एफआईआर दर्ज करने की मांग की है।
दरअसल, ग्राम लोरा में घटित घटना 09 अक्टूबर की रात्रि की है, जहां अज्ञात चोरों ने सूने मकान और मौके का फायदा उठाते हुए चोरी की बड़ी वारदात को अंजाम दिया। पीड़ित के अनुसार बेडरूम की अलमारी में सात लाख रुपये तथा दूसरी अलमारी में पत्नी के सोने-चांदी के जेवरात रखे हुए थे, इसके अलावा बेटे के कमरे की अलमारी में भी कुछ रुपए और बहू के जेवरात रखे हुए थे। वहीं घर के एक कमरे में संचालित किराना दुकान में भी एक अलमारी में दुकान के पैसे रखे हुए थे। इन चारों अलमारियों को चोरों ने अपना निशाना बनाया और उनके लॉकर तोड़कर तकरीबन 07 लाख 65 हजार रु. और लगभग तीन लाख रु. कीमत के सोने-चांदी के जेवरात लेकर फरार हो गए।
बताया गया कि 9 अक्टूबर को पूरा परिवार बेटी के घर एक कार्यक्रम में बालाघाट गया हुआ था, जहां से दूसरे दिन 10 अक्टूबर की रात्रि 9 बजे वापस आए। जैसे ही घर के अंदर प्रवेश किया, तो घर की हालत देखकर सभी भौचक्के रह गए। घर के हर कमरे में चारों तरफ कपड़े और अन्य सामान तितर-बितर पड़े हुए थे। अलमारियां खुली और उनके लॉकर टूटे हुए थे। घर के अंदर का दृश्य देखकर परिवार के होश उड़ गए। तभी इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी डायल 112 को दी गई, जिसके बाद तत्काल पुलिस मौके पर पहुंची। इस दौरान यशवंत गोयल ने बताया कि उनका साइकिल का व्यापार है। साथ ही उन्होंने अभी मोटरसाइकिल पार्ट्स के लिए एक शोरूम बनाया है, जिसमें सामान खरीदी की तैयारी को लेकर उन्होंने रुपयों की व्यवस्था की थी।
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बेटी के घर कार्यक्रम था, इसलिए खरीदी नहीं कर पाए थे, किंतु खरीदी से पहले ही चोरों ने उनके अरमानों पर पानी फेर दिया। पुलिस जांच-पड़ताल तो कर रही है, लेकिन लिखाई गई एफआईआर ऑनलाइन दर्ज नहीं की गई है। पुलिस 07 लाख की राशि एफआईआर में दर्ज करने से मना कर रही है। बहरहाल जिले में इस तरह की चोरियां अब कोई नई बात नहीं रह गई है। बीते छह महीनों में इस तरह के कई मामले सामने आए हैं। जिसमें कुछ में पुलिस ने सफलता पाई है, लेकिन लगातार हो रही ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति से पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था और पेट्रोलिंग पर सवाल खड़े हो गए हैं।

