इंदौर। डॉ. अम्बेडकर नगर (महू) में भीमराव रामजी अम्बेडकर की जयंती इस बार अभूतपूर्व उत्साह और भव्यता के साथ मनाई गई। ‘जय भीम’ के गगनभेदी नारों के बीच हजारों श्रद्धालु बाबा साहेब की जन्मस्थली पर पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। 12 अप्रैल से ही लोगों का आना शुरू हो गया था, जो 14 अप्रैल तक लगातार जारी रहा।
मुख्यमंत्री की मौजूदगी
सूत्रों के मुताबिक, मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी कार्यक्रम में शामिल होगें। पूरे आयोजन को सफल बनाने के लिए प्रशासन ने इलाके को 7 सेक्टरों में बांटकर सुरक्षा, ट्रैफिक और भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए। कंट्रोल रूम, मेडिकल टीम और फायर ब्रिगेड को भी अलर्ट मोड पर रखा गया।
श्रद्धालुओं के लिए ‘मेहमाननवाजी’ जैसी व्यवस्था
जयंती समारोह में आने वाले लोगों के लिए रहने, खाने और पानी की व्यापक व्यवस्था की गई। साथ ही धर्मशालाएं, स्कूल और विशाल डोम में ठहरने की सुविधा, स्वर्ग मंदिर परिसर में भोजन की व्यवस्था, अस्थायी शौचालय और प्याऊ की स्थापना और बाहर से आए श्रद्धालुओं के लिए मराठी भाषी सहायता कर्मी भी रखें गए है। इस बार आयोजन को “आस्था + व्यवस्था” के मॉडल के रूप में पेश किया गया।
कार्यक्रम के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए 6 आकस्मिक चिकित्सा केंद्र बनाए गए है, डॉक्टरों और एंबुलेंस की टीम तैनात की गई है और सफाई व्यवस्था के लिए नगर निगम की विशेष टीमें लगाई गईं है।
गरमाई राजनीति
इस आयोजन के बीच राजनीतिक बयानबाजी भी तेज रही। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि- “भाजपा बाबा साहेब की तस्वीर लगाकर कार्यक्रम करती है, लेकिन संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ करती है।” इस बयान के बाद अंबेडकर जयंती का मंच सामाजिक के साथ-साथ राजनीतिक विमर्श का केंद्र भी बन गया।
अंबेडकर जयंती सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि संविधान, समानता और सामाजिक न्याय के मूल्यों को याद करने का अवसर भी बन गई। महू में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण रहा कि बाबा साहेब के विचार आज भी समाज को जोड़ने की ताकत रखते हैं।

