मुंबई। वैश्विक तनाव और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर सोमवार को भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बाजार में शुरुआती घंटों में जबरदस्त बिकवाली देखने को मिली, जिससे सेंसेक्स 1000 अंक तक टूट गया। हालांकि दिन के अंत तक बाजार ने मजबूत रिकवरी दिखाई और हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ। उधर डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ 96.33 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि कच्चे तेल की कीमतें भी 110 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गईं।
शुरुआती कारोबार में बाजार में मची हलचल
सोमवार सुबह बाजार खुलते ही निवेशकों में घबराहट का माहौल देखने को मिला। सेंसेक्स एक समय 74,180 तक फिसल गया था, लेकिन बाद में खरीदारी लौटने से यह 77 अंकों की तेजी के साथ 75,315 पर बंद हुआ। वहीं निफ्टी भी दिनभर के उतार-चढ़ाव के बाद लगभग सपाट बंद हुआ।
IT शेयरों ने बाजार को दिया सहारा
दिनभर की अस्थिरता के बीच आईटी सेक्टर ने बाजार को सपोर्ट देने का काम किया। टेक और डिजिटल कंपनियों के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जिससे बाजार को निचले स्तर से उबरने में मदद मिली। हालांकि बैंकिंग, ऑटो और एनर्जी सेक्टर में दबाव बना रहा।
रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचा रुपया
डॉलर के मुकाबले भारतीय मुद्रा में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। रुपया 20 पैसे से ज्यादा टूटकर 96.33 प्रति डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। कमजोर रुपये का असर आयात लागत, विदेशी निवेश और महंगाई पर पड़ सकता है।
कच्चा तेल 110 डॉलर के पार, क्यों बढ़ी चिंता?
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में करीब 2 प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई। ब्रेंट क्रूड 110 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया। माना जा रहा है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान विवाद की वजह से सप्लाई को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हालिया बयान के बाद बाजार में भू-राजनीतिक जोखिम और बढ़ गए हैं।
बाजार के लिए अहम सपोर्ट और रेजिस्टेंस लेवल
मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर प्रमुख तकनीकी स्तरों पर रहेगी।
सेंसेक्स के लिए अहम स्तर
- सपोर्ट जोन: 74,500 – 74,200
- रेजिस्टेंस जोन: 75,600 – 76,000
निफ्टी के लिए अहम स्तर
- सपोर्ट: 23,250 और 23,000
- रेजिस्टेंस: 24,000 और 24,250
विश्लेषकों का कहना है कि यदि निफ्टी 23,000 के नीचे जाता है, तो बाजार में बिकवाली और तेज हो सकती है।
अब निवेशकों की नजर अमेरिका-ईरान तनाव, कच्चे तेल की कीमतों, डॉलर इंडेक्स और विदेशी निवेशकों की गतिविधियों पर बनी रहेगी। अगर वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं तो बाजार में आने वाले दिनों में और तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।

