सना: यमन में हूती विद्रोहियों ने एक बार फिर बड़ा हमला किया है। अदन में राष्ट्रपति भवन पर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गईं। इसके साथ ही अदन एयरपोर्ट को भी निशाना बनाया गया। वहीं, सऊदी अरब की ओर भेजे गए ड्रोन को भी मार गिराया गया।
न्यूज एजेंसी AFP के मुताबिक, राष्ट्रपति भवन की ओर एंबुलेंस जाती दिखाई दीं। हालांकि, मिसाइलें अपने निशाने पर लगीं या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हुई है। यमन सरकार के सैन्य प्रवक्ता ने भी हमले में किसी के मारे जाने या घायल होने की जानकारी नहीं दी।
राष्ट्रपति भवन पर 15 दिन में यह दूसरा हमला
राष्ट्रपति भवन पर 15 दिन में यह दूसरा हमला है। इससे पहले 15 अक्टूबर को हुए हमले में चार लोगों की मौत हुई थी। उधर, हूती विद्रोहियों ने सऊदी अरब के मदीना इलाके की ओर भी ड्रोन भेजा, जिसे सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने हवा में ही मार गिराया।
जुलाई से अदन में हमले फिर बढ़े हैं
अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का प्रमुख केंद्र है। हूती विद्रोहियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद सरकार को सना छोड़ना पड़ा था। जुलाई से अदन में हमले फिर बढ़े हैं।
इससे पहले 28 अक्टूबर को भी हूती विद्रोहियों ने अदन एयरपोर्ट को निशाना बनाया था। हमले से पहले हूतियों ने लोगों को इलाका खाली करने की चेतावनी दी थी। यह एयरपोर्ट दक्षिणी यमन में राहत सामग्री और मानवीय मदद पहुंचाने का अहम रास्ता है।
सऊदी अरब के समर्थन से लड़ रही यमन की सरकार
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार के बीच लंबे समय से संघर्ष जारी है। सऊदी अरब यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का समर्थन करता है।
वह हूतियों के खिलाफ लड़ रही सरकारी सेना को हवाई मदद भी देता है। वहीं, ईरान पर हूतियों को समर्थन देने के आरोप लगते रहे हैं।
राष्ट्रपति भवन परिसर पर हमले के बाद यमन में संघर्ष और तेज होने की आशंका है। हूतियों ने कहा है कि उन्होंने सऊदी सैन्य अभियान से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाया था।
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2015 से जारी है सऊदी और हूतियों की लड़ाई
- यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया।
- सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो।
- इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया।
- हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है।

