जबलपुर: मध्य प्रदेश सरकार ने मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति (VC) पद की पात्रता से जुड़े नियमों में बदलाव करने की जानकारी हाईकोर्ट को दी है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश विवेक रूसिया की अध्यक्षता वाली डिवीजन बेंच के सामने सरकार ने बताया कि जल्द ही इस संबंध में विधानसभा में नया विधेयक पेश किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, प्रस्तावित बदलाव के बाद सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के रूप में 10 साल के अनुभव की अनिवार्यता समाप्त की जाएगी और पुराने नियमों को दोबारा लागू किया जाएगा।
क्या था पूरा मामला?
यह मामला जबलपुर के सुखसागर मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर पंकज कमल धार्वे द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ता ने एमपी मेडिकल यूनिवर्सिटी (संशोधन) विधेयक, 2023 के प्रावधानों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
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इस संशोधन के तहत मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति पद के लिए किसी सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रोफेसर के तौर पर कम से कम 10 वर्ष का अनुभव अनिवार्य किया गया था।
निजी कॉलेजों के प्रोफेसरों ने जताई थी आपत्ति
याचिका में इस नियम को मनमाना और भेदभावपूर्ण बताया गया था। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस प्रावधान के कारण निजी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत योग्य प्रोफेसर कुलपति पद की दौड़ से बाहर हो रहे हैं।
हाईकोर्ट ने सरकार से मांगा विस्तृत जवाब
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने अपने पक्ष में नियमों में बदलाव करने की जानकारी कोर्ट के सामने रखी। हाईकोर्ट ने सरकार के इस आश्वासन को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले में विस्तृत और सिलसिलेवार हलफनामा पेश करने के निर्देश दिए हैं।
नए बदलाव से खुल सकता है नियुक्ति का रास्ता
सरकार के प्रस्तावित कदम के बाद निजी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत प्रोफेसरों के लिए भी मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय के कुलपति पद पर नियुक्ति का रास्ता खुल सकता है। अब इस मामले में आगे की प्रक्रिया सरकार के जवाब और विधानसभा में पेश होने वाले विधेयक पर निर्भर करेगी।

