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एमपीपीसीबी अध्यक्ष अनिरुद्ध मुखर्जी की नियुक्ति पर सवाल, पांच महीने के कार्यकाल की जांच की मांग

भोपाल। मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एमपीपीसीबी) के अध्यक्ष पद पर अनिरुद्ध मुखर्जी की नियुक्ति को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। 1993 बैच के वरिष्ठ आईएएस अधिकारी मुखर्जी पर बिना निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के करीब पांच महीने तक अध्यक्ष पद का प्रभार संभालने का आरोप लगाया गया है। पर्यावरण एवं वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस मामले में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री, कैबिनेट सचिव और मुख्य सचिव को ज्ञापन भेजकर नियुक्ति की वैधानिकता की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने मामले में एफआईआर, निलंबन और लोकायुक्त जांच की मांग भी उठाई है।

मुख्यमंत्री ने प्रस्ताव निरस्त किया, फिर भी पद पर बने रहने का आरोप

अजय दुबे ने अपने ज्ञापन में दावा किया है कि सामान्य प्रशासन विभाग ने 17 जून 2026 को आदेश जारी कर अनिरुद्ध मुखर्जी को अपर मुख्य सचिव (पर्यावरण), पर्यावरण आयुक्त और महानिदेशक (ईपीसीओ) का अतिरिक्त प्रभार सौंपा था। हालांकि, इस आदेश में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष पद का उल्लेख नहीं था।

ज्ञापन के अनुसार, छह जुलाई 2026 को मुखर्जी ने स्वयं को बोर्ड अध्यक्ष बनाए जाने का प्रस्ताव मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया था। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं होने के कारण प्रस्ताव निरस्त कर दिया था। इसके बावजूद मुखर्जी अध्यक्ष के रूप में काम करते रहे।

नियुक्ति प्रक्रिया और वैधानिक प्रावधानों पर सवाल

दुबे ने जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 की धारा 4(2) का हवाला देते हुए कहा है कि बोर्ड अध्यक्ष की नियुक्ति निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया के तहत होनी चाहिए। इसके लिए सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी और राजपत्र अधिसूचना से जुड़ी प्रक्रिया का पालन जरूरी बताया गया है। उनका आरोप है कि इन औपचारिकताओं के बिना ही मुखर्जी ने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाला।

पांच महीने के फैसलों की वैधानिकता जांचने की मांग

ज्ञापन में कथित पांच महीने के कार्यकाल के दौरान लिए गए फैसलों पर भी सवाल उठाए गए हैं। दुबे का आरोप है कि इस अवधि में औद्योगिक इकाइयों को पर्यावरणीय सम्मतियां और अन्य अनुमतियां जारी की गईं। इसके अलावा पदोन्नति और तबादलों से जुड़े निर्णय भी लिए गए।

उन्होंने मांग की है कि इस अवधि में जारी सभी आदेशों, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और प्रशासनिक निर्णयों की वैधानिकता की समीक्षा कराई जाए।

एफआईआर और लोकायुक्त जांच की मांग

अजय दुबे ने अनिरुद्ध मुखर्जी के खिलाफ कथित धोखाधड़ी और पद के दुरुपयोग के आरोपों में एफआईआर दर्ज करने, गिरफ्तारी और निलंबन की मांग की है। साथ ही विभागीय कार्रवाई के बाद सेवा से बर्खास्त करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।

उन्होंने कथित पांच महीने के कार्यकाल के दौरान हुए वित्तीय लेनदेन और प्रशासनिक फैसलों की लोकायुक्त से निष्पक्ष जांच कराने का आग्रह किया है। फिलहाल ये आरोप शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए हैं। मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही पूरे प्रकरण की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

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