नई दिल्ली: भारत में इस वर्ष आयोजित होने जा रही म्यूनिख लीडर्स मीटिंग को लेकर कूटनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। एक ओर इसे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका का संकेत माना जा रहा है, वहीं दूसरी ओर पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने इसके आयोजन पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह पहल भारत के रणनीतिक हितों के अनुरूप नहीं है।
4 और 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में होगा सम्मेलन
म्यूनिख सिक्योरिटी कॉन्फ्रेंस (MSC) ने घोषणा की है कि इस वर्ष 4 और 5 अक्टूबर को नई दिल्ली में म्यूनिख लीडर्स मीटिंग आयोजित की जाएगी। भारत सरकार के सहयोग से होने वाले इस सम्मेलन में इंडो-पैसिफिक, यूरोप और अमेरिका के नीति-निर्माता, रणनीतिक विशेषज्ञ और सुरक्षा मामलों के जानकार वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों पर चर्चा करेंगे।
सम्मेलन के आयोजकों के अनुसार, बैठक में मौजूदा वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, क्षेत्रीय स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श होगा।
कंवल सिब्बल ने जताई आपत्ति
सम्मेलन की घोषणा के बाद भारत के पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए इस पहल पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि यूरोप इस समय गंभीर सुरक्षा चुनौतियों का सामना कर रहा है और सबसे पहले उसे उन्हीं समस्याओं के समाधान पर ध्यान देना चाहिए। उनका कहना था कि यूरोपीय देशों के मौजूदा संकटों का असर केवल यूरोप तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी कीमत ग्लोबल साउथ के कई देशों को भी चुकानी पड़ रही है।
यह पहल भारत के हितों के अनुरूप नहीं
कंवल सिब्बल ने अपने बयान में कहा कि यूरोप को पहले अपनी सुरक्षा चुनौतियों का समाधान करना चाहिए, उसके बाद ही यूरोप से बाहर रणनीतिक समर्थन बढ़ाने के उद्देश्य से भारत जैसे देशों में सम्मेलन आयोजित करने की पहल करनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह आयोजन भारत के रणनीतिक हितों की पूर्ति नहीं करता।
कूटनीतिक हलकों में तेज हुई बहस
म्यूनिख लीडर्स मीटिंग को लेकर अब कूटनीतिक और रणनीतिक विशेषज्ञों के बीच अलग-अलग राय सामने आ रही है। कुछ विशेषज्ञ इसे वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती अहमियत और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी मजबूत भूमिका का संकेत मान रहे हैं, जबकि कुछ इसे लेकर सवाल भी उठा रहे हैं।
अब अक्टूबर में होने वाले इस सम्मेलन और उसमें होने वाली चर्चाओं पर देश-विदेश के रणनीतिक विशेषज्ञों और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजरें टिकी रहेंगी।

