चांदीपुर (ओडिशा): भारत ने अपनी सामरिक रक्षा क्षमता को एक और बड़ी मजबूती देते हुए मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-4 का सफल परीक्षण किया है। ओडिशा के चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज (ITR) से किए गए इस परीक्षण ने एक बार फिर देश की स्वदेशी रक्षा तकनीक की ताकत दुनिया के सामने रख दी। स्ट्रैटेजिक फोर्सेज कमांड की निगरानी में हुए इस परीक्षण में मिसाइल ने सभी परिचालन और तकनीकी मानकों को सफलतापूर्वक पूरा किया।
करीब 3000 किलोमीटर से अधिक दूरी तक लक्ष्य भेदने में सक्षम अग्नि-4 भारत की रणनीतिक प्रतिरोधक क्षमता को और मजबूत बनाएगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब वैश्विक सुरक्षा चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं और भारत अपनी रक्षा तैयारियों को नई ऊंचाइयों पर ले जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक से लैस
अग्नि-4 में पांचवीं पीढ़ी के ऑनबोर्ड कंप्यूटर, आधुनिक एवियोनिक्स, डिस्ट्रिब्यूटेड आर्किटेक्चर, रिंग लेजर गायरो आधारित इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (RINS) और माइक्रो नेविगेशन सिस्टम (MINGS) जैसी अत्याधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है। इनकी मदद से मिसाइल उड़ान के दौरान आने वाली किसी भी बाधा का स्वतः आकलन कर अपना मार्ग बदल सकती है और बेहद सटीकता के साथ लक्ष्य को भेद सकती है।
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इसकी सबसे बड़ी विशेषताओं में से एक इसका री-एंट्री हीट शील्ड है, जिसने परीक्षण के दौरान लगभग 4000 डिग्री सेल्सियस तापमान को सफलतापूर्वक सहन किया। इसके बावजूद मिसाइल के भीतर मौजूद संवेदनशील उपकरण सामान्य रूप से कार्य करते रहे और आंतरिक तापमान सुरक्षित स्तर पर बना रहा। इससे पहले भी अग्नि श्रृंखला की मिसाइलें अपनी क्षमता साबित कर चुकी हैं, लेकिन अग्नि-4 का यह सफल परीक्षण भारत की रक्षा तैयारियों और आत्मनिर्भर सैन्य तकनीक को नई मजबूती देने वाला माना जा रहा है।

