ढाका: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने इस वर्ष के अंत तक स्वदेश लौटने का ऐलान कर देश की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। नई दिल्ली से आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि यदि बांग्लादेश लौटने पर उन्हें गिरफ्तार किया जाता है, जेल भेजा जाता है या किसी भी तरह की सजा का सामना करना पड़ता है, तो भी वह पीछे नहीं हटेंगी। 78 वर्षीय हसीना ने कहा कि जनता के प्रति उनकी जिम्मेदारी किसी भी डर से बड़ी है।
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उन्होंने जुलाई 2024 की घटनाओं को जनआंदोलन मानने से इनकार करते हुए दावा किया कि उनकी सरकार को हटाने के लिए सुनियोजित अभियान चलाया गया था। उन्होंने अपनी प्रस्तावित वापसी को लोकतंत्र की बहाली और राष्ट्रीय सुलह की दिशा में एक प्रयास बताया। वहीं, उनके इस बयान के दौरान ढाका में विरोध प्रदर्शन हुए और उनका पुतला भी फूंका गया, जिससे देश का राजनीतिक माहौल और गर्म हो गया।
भाषण पर बांग्लादेश सरकार की आपत्ति
बता दें शेख हसीना के संबोधन पर बांग्लादेश सरकार ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि भारतीय धरती से इस तरह का सार्वजनिक कार्यक्रम आयोजित होना बांग्लादेश की संप्रभुता और जुलाई क्रांति की भावना के खिलाफ है। सरकार ने पहले ही उनके भाषण के प्रसारण और रिपोर्टिंग पर प्रतिबंध लगाया था और चेतावनी दी थी कि आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि मौजूदा राजनीतिक हालात को देखते हुए शेख हसीना की संभावित वापसी को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि वह बांग्लादेश लौटती हैं, तो उन्हें कानूनी कार्रवाई, गिरफ्तारी या अन्य न्यायिक प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, उनकी वापसी और उससे जुड़े संभावित घटनाक्रम पूरी तरह बांग्लादेश की मौजूदा कानूनी और राजनीतिक परिस्थितियों पर निर्भर करेंगे।

