भोपाल। ट्विशा शर्मा मौत मामले की जांच में एक गंभीर लापरवाही सामने आई है, जिससे पूरे केस की जांच प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं। जिस लिगेचर बेल्ट से ट्विशा को फंदे पर लटका पाया गया था, उसे घटनास्थल से बरामद होने के बाद दो दिन तक संबंधित सब-इंस्पेक्टर दिनेश शर्मा अपनी कार में ही रखते रहे। बाद में हंगामे के बाद इस अहम साक्ष्य को फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) भेजा गया।
पोस्टमार्टम प्रक्रिया के दौरान भी यह महत्वपूर्ण साक्ष्य एम्स अस्पताल में सुरक्षित रूप से जमा नहीं कराया गया था, जिससे जांच की निष्पक्षता और साक्ष्य संरक्षण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। अब सीबीआई इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारी से पूछताछ की तैयारी कर रही है।

जांच एजेंसी का मानना है कि साक्ष्यों के सही तरीके से सुरक्षित न रखे जाने से जांच की दिशा प्रभावित हो सकती है, इसलिए मामले से जुड़े सभी पहलुओं की दोबारा समीक्षा की जा रही है। इधर, ट्विशा के परिजनों ने शुरुआत से ही मौत को संदिग्ध बताते हुए हत्या की आशंका जताई थी। उनका कहना है कि यदि यह आत्महत्या थी, तो फंदे में इस्तेमाल वस्तु को सुरक्षित क्यों नहीं रखा गया और जांच प्रक्रिया में क्यों शामिल नहीं किया गया।
इसके अलावा जांच में यह भी सामने आया है कि ट्विशा जिस कंपनी में कार्यरत थीं, वहां पिछले 6-7 महीनों से उन्हें नियमित वेतन नहीं मिल रहा था। जांच एजेंसियां अब आर्थिक तनाव, व्यक्तिगत संबंधों और मानसिक स्थिति जैसे पहलुओं की भी गहन जांच कर रही हैं, ताकि मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को स्पष्ट किया जा सके।

