नई दिल्ली: कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के मतदाता सूची में नाम शामिल किए जाने से जुड़े मामले में दिल्ली की सत्र अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने मजिस्ट्रेट अदालत के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाली शिकायत खारिज कर दी गई थी। अब मामले की नए सिरे से सुनवाई होगी। अगली सुनवाई 29 सितंबर को निर्धारित की गई है।
मामला सोनिया गांधी का नाम भारतीय नागरिक बनने से पहले मतदाता सूची में शामिल किए जाने के आरोप से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि सोनिया गांधी के भारतीय नागरिक बनने से पहले उनका नाम मतदाता सूची में दर्ज किया गया था। इसी आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की गई थी।
2025 में मजिस्ट्रेट ने खारिज की थी शिकायत
अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 2025 में शिकायत खारिज कर दी थी। अदालत ने शिकायत में लगाए गए आरोपों के आधार और उपलब्ध दस्तावेजों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद शिकायतकर्ता ने इस आदेश को सत्र अदालत में चुनौती दी।
पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई करते हुए विशेष न्यायाधीश (एमपी-एमएलए मामले) ने मजिस्ट्रेट के आदेश को रद्द कर दिया। सत्र अदालत ने कहा कि शिकायत को केवल एक अप्रमाणित रिकॉर्ड की फोटोकॉपी के आधार पर तथ्यात्मक दावा मानकर खारिज कर दिया गया था।
नागरिकता के मुद्दे पर टिप्पणी भी उचित नहीं मानी
सत्र अदालत ने मजिस्ट्रेट के आदेश में नागरिकता से जुड़े क्षेत्राधिकार के संबंध में की गई टिप्पणियों को भी उचित नहीं माना। अदालत ने कहा कि आदेश में इस सवाल पर स्पष्ट कारण नहीं दिए गए कि शिकायत में किसी संज्ञेय अपराध का खुलासा होता है या नहीं।
अदालत ने मामले को वापस मजिस्ट्रेट अदालत भेजते हुए शिकायत पर कानून के अनुसार नए सिरे से सुनवाई करने और कारण स्पष्ट करने वाला आदेश पारित करने को कहा है।
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अभी एफआईआर दर्ज करने का आदेश नहीं
सत्र अदालत के इस फैसले का अर्थ यह नहीं है कि सोनिया गांधी के खिलाफ अभी प्राथमिकी दर्ज हो गई है। अदालत ने केवल पहले के आदेश को रद्द कर शिकायत पर दोबारा सुनवाई का निर्देश दिया है। अब मजिस्ट्रेट अदालत उपलब्ध सामग्री और शिकायत में लगाए गए आरोपों पर नए सिरे से विचार करेगी। 29 सितंबर की सुनवाई के बाद मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया स्पष्ट होगी।

