उमंग सिंघार बोले- अब तय हो जिम्मेदारी
भोपाल। सीधी जिले में एक वर्ष के भीतर हुई 53 मातृ मृत्यु के मामले ने अब राष्ट्रीय स्तर पर भी चिंता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने मामले का स्वतः संज्ञान लेते हुए मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। इस कार्रवाई के बाद नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि जिन सवालों को उन्होंने पहले उठाया था, अब उनकी गंभीरता राष्ट्रीय स्तर पर भी स्वीकार की गई है।
उमंग सिंघार ने कहा कि सीधी जिले में लगातार हो रही गर्भवती महिलाओं की मौतों, डॉक्टरों की कमी, एम्बुलेंस संकट और कमजोर स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उन्होंने सरकार का ध्यान आकर्षित किया था, लेकिन सरकार जवाब देने से बचती रही। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के हस्तक्षेप ने साबित कर दिया है कि मामला बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। उन्होंने कहा कि 53 माताओं की मौत केवल एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की खामियों, प्रशासनिक लापरवाही और उन परिवारों के दर्द की कहानी है जिन्होंने अपनी बेटियों और बहुओं को खो दिया।
नेता प्रतिपक्ष ने मांग की कि जांच केवल सीधी जिले तक सीमित न रहे, बल्कि पूरे मध्यप्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं, संस्थागत प्रसव व्यवस्था, डॉक्टरों की उपलब्धता, एम्बुलेंस नेटवर्क और ग्रामीण स्वास्थ्य ढांचे की उच्च स्तरीय समीक्षा कराई जाए। उन्होंने कहा कि यदि समय रहते अन्य जिलों की स्थिति का आकलन नहीं किया गया तो ऐसी घटनाएं प्रदेश के अन्य हिस्सों में भी सामने आ सकती हैं।
सिंघार ने उम्मीद जताई कि मानव अधिकार आयोग की पहल के बाद जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी और मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने के लिए सरकार ठोस कदम उठाने को मजबूर होगी।

