लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष का बड़ा कदम

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दिल्ली। लोकसभा में विपक्ष ने स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की औपचारिक प्रक्रिया शुरू कर दी है। Rule 94(c) के तहत विपक्षी सांसदों ने इस प्रस्ताव का नोटिस लोकसभा महासचिव को सौंपा है। इस नोटिस पर कुल 118 सांसदों के हस्ताक्षर दर्ज हैं, जिससे संसद के भीतर सियासी हलचल तेज हो गई है।

किन दलों ने दिया समर्थन

सूत्रों अनुसार इस अविश्वास प्रस्ताव पर कांग्रेस के साथ समाजवादी पार्टी, वाम दल और राष्ट्रीय जनता दल के सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने इस पहल से दूरी बनाए रखी है। नोटिस सौंपने के दौरान कांग्रेस सांसद सुरेश कोडिकुन्निल, गौरव गोगोई और मोहम्मद जावेद लोकसभा महासचिव के कार्यालय पहुंचे।

विपक्ष का आरोप: सदन में निष्पक्षता नहीं

वहीं विपक्ष का कहना है कि लोकसभा की कार्यवाही के दौरान स्पीकर का रवैया निष्पक्ष नहीं रहा है। विपक्षी दलों का आरोप है कि उनकी आवाज को बार-बार दबाया गया और सत्ता पक्ष को खुली छूट दी गई। कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी स्पीकर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि- उन पर दबाव बनाकर बयान दिलवाया जा रहा है, जो लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ है। विपक्ष द्वारा सौंपे गए अविश्वास प्रस्ताव के नोटिस में चार प्रमुख बिंदुओं को आधार बनाया गया है। इनमें नेता विपक्ष राहुल गांधी को बोलने से रोका जाना, विपक्ष के आठ सांसदों का निलंबन, भाजपा सांसद को पूर्व प्रधानमंत्रियों पर आपत्तिजनक टिप्पणी की अनुमति देना और कांग्रेस सांसदों पर साजिश के आरोप शामिल हैं।

स्पीकर को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया क्या है?

बता दें लोकसभा स्पीकर को हटाने की प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 94 और लोकसभा की कार्यप्रणाली से जुड़े नियमों के तहत होती है। इसके अनुसार, प्रस्ताव का स्पष्ट नोटिस महासचिव को देना होता है, जिसमें आरोप साफ और तथ्यात्मक होने चाहिए। प्रस्ताव को आगे बढ़ाने के लिए कम से कम 50 सांसदों का समर्थन जरूरी होता है। नोटिस स्वीकार होने के बाद 14 दिनों के भीतर चर्चा की तारीख तय की जाती है और बहुमत के आधार पर मतदान होता है।

 

 

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