बालाघाट: मध्यप्रदेश पंचायत सचिव संगठन द्वारा शुक्रवार को पंचायत सचिव संवर्ग की लंबित न्यायोचित मांगों के शीघ्र निराकरण और शासन द्वारा पूर्व में की गई घोषणाओं के लंबित आदेश जारी करने की मांग को लेकर मुख्यमंत्री के नाम मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत बालाघाट को ज्ञापन सौंपा गया। संगठन ने शासन से पंचायत सचिवों की समस्याओं पर गंभीरता से विचार कर जल्द आवश्यक निर्णय लेने की मांग की है।
संगठन ने ज्ञापन में कहा कि पंचायत सचिव ग्राम पंचायत स्तर पर शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं और ग्रामीण विकास से जुड़े कार्यों के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। सीमित संसाधनों के बीच लगातार बढ़ते कार्यभार के बावजूद पंचायत सचिव शासन और ग्रामीण जनता के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं। इसके बावजूद लंबे समय से उनकी कई सेवा संबंधी मांगें लंबित हैं।
ज्ञापन में पंचायत सचिवों ने पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग में विभागीय संविलियन करने की मांग प्रमुखता से रखी। संगठन का कहना है कि संविलियन होने से पंचायत सचिवों को सेवा सुरक्षा, भविष्य की स्पष्टता और निर्धारित सेवा शर्तों का लाभ मिल सकेगा।
इसके अलावा पंचायत सचिवों को स्वामित्व योजना एवं राजस्व प्रकृति के कार्यों से मुक्त करने की मांग की गई है। संगठन ने कहा कि अधिकार अभिलेख, पंजीयन, ई-केवाईसी तथा भूमि एवं संपत्ति से जुड़े व्यक्तिगत कार्यों सहित राजस्व विभाग की प्रकृति वाले कार्य संबंधित विभाग के अमले से कराए जाएं।
पूर्व घोषणाओं के आदेश जारी करने की मांग
ज्ञापन में 3 अगस्त 2023 को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में आयोजित पंचायत सचिव सम्मेलन सहित शासन द्वारा पंचायत सचिवों के संबंध में पूर्व में की गई घोषणाओं को लागू करने और उनके लंबित शासनादेश तत्काल जारी करने की मांग की गई।
संगठन ने समयमान वेतनमान का लाभ देने तथा वर्षों से लंबित वेतन विसंगति का निराकरण करने की मांग भी रखी। साथ ही पंचायत समन्वय अधिकारी के पद पर 50 प्रतिशत विभागीय पदोन्नति कोटा प्रभावी रूप से लागू करने की मांग की गई है।
अवकाश नकदीकरण, स्वास्थ्य सुविधा और पेंशन की मांग
पंचायत सचिवों को नियमानुसार 300 दिवस के अर्जित अवकाश के नकदीकरण की सुविधा देने तथा पंचायत सचिव एवं उनके परिवार को कैशलेस स्वास्थ्य बीमा अथवा आयुष्मान योजना में शामिल करने की मांग की गई। संगठन ने प्रत्येक पंचायत सचिव का आयुष्मान कार्ड बनाए जाने की भी मांग रखी।
मनरेगा कार्यों में अपूर्ण अथवा प्रगतिरत कार्यों को लेकर वास्तविक भौतिक प्रगति, गुणवत्ता एवं स्थल सत्यापन किए बिना पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों से वसूली नहीं करने की मांग की गई। पूर्व में की गई वसूली की भी नियमानुसार समीक्षा करने की बात कही गई।
संगठन ने पात्र पंचायत सचिवों के सेवाकाल की गणना नियुक्ति दिनांक से करने और प्रचलित नियमों एवं लागू न्यायालयीन निर्णयों के अनुरूप पुरानी पेंशन योजना का लाभ प्रदान करने के लिए आवश्यक आदेश जारी करने की मांग की।
अनुकंपा नियुक्ति के लंबित मामलों के निराकरण की मांग
ज्ञापन में सेवाकाल के दौरान दिवंगत पंचायत सचिवों के पात्र ओबीसी वर्ग के अनुकंपा आश्रितों के लंबित प्रकरणों का शीघ्र निराकरण कर नियमानुसार नियुक्ति देने की मांग की गई। वहीं अनुकंपा नियुक्ति प्राप्त पात्र आश्रितों को सीपीसीटी परीक्षा उत्तीर्ण करने के लिए नियुक्ति दिनांक से दो वर्ष की अवधि देने और नियुक्ति के समय सीपीसीटी की अनिवार्यता में आवश्यक छूट देने की मांग भी रखी गई।
इसके साथ ही सेवानिवृत्त पंचायत सचिवों के लंबित ग्रेच्युटी एवं एनपीएस संबंधी प्रकरणों का तत्काल निराकरण कर सभी देय राशि का शीघ्र भुगतान करने की मांग की गई। सेवानिवृत्ति के समय वर्तमान में मिलने वाली राशि को बढ़ाकर न्यूनतम 10 लाख रुपये किए जाने की मांग भी संगठन ने रखी।
अतिरिक्त कार्यों से मुक्त करने की मांग
संगठन ने पंचायत सचिवों से उनके मूल पंचायत दायित्वों के अलावा ऐसे अतिरिक्त एवं गैर-पंचायत कार्य नहीं कराने की मांग की, जिनके लिए संबंधित विभागों का पृथक अमला उपलब्ध है। प्रत्येक कार्य के लिए स्पष्ट उत्तरदायित्व तय करने की बात कही गई।
ज्ञापन में पंचायत सचिवों के कार्यभार और दीर्घ सेवा को देखते हुए सम्मानजनक वेतन, सेवा सुरक्षा एवं कर्मचारी हितैषी सेवा शर्तें सुनिश्चित करने की मांग की गई। साथ ही वेतन, पदोन्नति, सेवा अवधि, अवकाश, स्थानांतरण, पेंशन, अनुकंपा नियुक्ति सहित अन्य सेवा संबंधी समस्याओं के निराकरण के लिए शासन स्तर पर स्थायी एवं समयबद्ध शिकायत निवारण व्यवस्था बनाए जाने की मांग भी शामिल है।
यह भी पढ़े : खाद संकट पर भड़के सिंधिया, कलेक्टर की लगाई क्लास; बोले- कहां हैं, जल्दी बुलाओ
मांगें पूरी नहीं हुईं तो चरणबद्ध आंदोलन
पंचायत सचिव संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से शासन को स्पष्ट किया कि उनकी मांगें किसी विशेष सुविधा से संबंधित नहीं हैं, बल्कि सेवा सुरक्षा, सम्मानजनक सेवा शर्तों और लंबे समय से लंबित अधिकारों के न्यायोचित निराकरण से जुड़ी हैं।
संगठन ने मांगों पर शीघ्र उच्चस्तरीय निर्णय लेकर आवश्यक शासनादेश जारी करने का आग्रह किया है। साथ ही चेतावनी दी गई है कि यदि मांगों का शीघ्र एवं सकारात्मक निराकरण नहीं किया गया तो पंचायत सचिव लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर संगठन द्वारा अनिश्चितकालीन हड़ताल एवं व्यापक आंदोलन का निर्णय लिए जाने की बात भी कही गई है।
संगठन ने शासन से अपील की है कि पंचायत सचिवों की भावनाओं और लंबित समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए आंदोलन की स्थिति उत्पन्न होने से पहले ही मांगों का निराकरण किया जाए।

