पटना। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव की गिरफ्तारी ने बिहार की राजनीति में हलचल मचा दी है। 31 साल पुराने एक मामले में हुई इस कार्रवाई को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। इसी बीच पटना के गर्ल्स हॉस्टल में संदिग्ध परिस्थितियों में जान गंवाने वाली NEET छात्रा के परिजनों ने इस गिरफ्तारी को सरकार की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
न्याय की लड़ाई दबाने की कोशिश- परिजनों का आरोप
वहीं छात्रा के परिजनों का कहना है कि- पप्पू यादव उनकी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई में शुरू से उनके साथ खड़े रहे हैं। परिवार का आरोप है कि यह गिरफ्तारी कानून व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके आंदोलन को कमजोर करने की कोशिश है। परिजनों के मुताबिक, घटना को एक महीना बीत जाने के बावजूद न तो निष्पक्ष जांच हुई और न ही सच्चाई सामने लाई गई।
इसके साथ ही परिजनों के मुताबिक, पप्पू यादव ने न सिर्फ आंदोलन की जिम्मेदारी ली थी, बल्कि दिल्ली प्रदर्शन के लिए उनकी रेल टिकट तक करवाई थी। परिवार का कहना है कि ऐसे समय में उनकी गिरफ्तारी यह साबित करती है कि सरकार इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रही है।
गर्ल्स हॉस्टल मौत मामला
बता दें पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में NEET की तैयारी कर रही छात्रा की मौत को लेकर कई सवाल उठ चुके हैं। सरकार ने मामले की सीबीआई जांच की सिफारिश जरूर की है, लेकिन परिवार न्यायिक जांच की मांग पर अड़ा हुआ है। वहीं परिजनों का कहना है कि उन्हें भरोसा नहीं है कि मौजूदा जांच से उन्हें न्याय मिल पाएगा।
8 फरवरी के प्रदर्शन से पहले गिरफ्तारी
छात्रा के परिवार ने 8 फरवरी को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया था। इस आंदोलन की अगुवाई पप्पू यादव करने वाले थे। परिजनों का दावा है कि प्रदर्शन से ठीक पहले 31 साल पुराने मामले में पप्पू यादव की गिरफ्तारी यह दिखाती है कि सरकार सच सामने आने से डर रही है। परिवार ने दो टूक कहा है कि पप्पू यादव की गिरफ्तारी से उनका आंदोलन रुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि अब वे सड़क से लेकर संसद तक अपनी बेटी को न्याय दिलाने की लड़ाई और मजबूती से लड़ेंगे।
विपक्ष ने उठाए सवाल
पप्पू यादव की गिरफ्तारी पर कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई पुराना मामला था, तो उन्हें जमानत लेने का मौका दिया जाना चाहिए था।
तारिक अनवर ने यह भी कहा कि एक मौजूदा सांसद को इस तरह गिरफ्तार कर जेल भेजना उचित नहीं लगता और यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित हो सकती है।


