भोपाल: उत्तर प्रदेश के बिजनौर में पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ के पिता की जमीन हड़पने की कोशिश हुई। आरोपियों ने फर्जी वसीयत और मृत्यु प्रमाण पत्र तैयार कराया। इसके बाद 26 बीघा जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया।
कमलनाथ की शिकायत पर नजीबाबाद थाने में केस दर्ज हुआ। आरोप है कि फर्जी दस्तावेज बनाकर उनकी 26 बीघा जमीन पर कब्जा हुआ है। पुलिस ने इस मामले में धर्मपाल सिंह और विजय शंकर को गिरफ्तार किया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। पुलिस के मुताबिक जमीन को कब्जा मुक्त कराने की प्रक्रिया चल रही है।
1998 की वसीयत, 2003 का प्रमाण पत्र
अब जरा पीछे चलते हैं। कमलनाथ ने एफआईआर में जमीन का ब्योरा दिया। उनके मुताबिक नजीबाबाद तहसील के अमीखानपुर गांव में पिता की 90 बीघा जमीन है।
इन आरोपियों ने 10 अक्टूबर 1998 की एक वसीयत तैयार की। यह वसीयत रजिस्ट्रार के यहां पंजीकृत नहीं थी। कमलनाथ के पिता महेंद्रनाथ का मृत्यु प्रमाण पत्र 10 अप्रैल 2003 को नजीबाबाद से जारी कराया गया। कमलनाथ के मुताबिक पिता की मृत्यु 7 सितंबर 2004 को हुई थी। जगह दिल्ली का एस्कार्ट अस्पताल बताई गई है।
विरासत दर्ज कराने से खुला मामला
इस कहानी का असली मोड़ यहीं से शुरू हुआ। जानकारी के अनुसार पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ ने 18 मई 2026 को नजीबाबाद तहसीलदार के यहां आवेदन किया था। वे जमीन पर विरासत (वारिस का नाम रिकॉर्ड में लिखवाना) दर्ज कराना चाहते थे।
इसके बाद लेखपाल ने जमीन को विवादित बताते हुए रिपोर्ट भेजी। तब जाकर कमलनाथ को पता चला कि नजीबाबाद कोर्ट में वाद चल रहा है। वाद का नाम धर्मपाल बनाम ग्राम सभा है।
किन लोगों पर दर्ज हुआ केस
जमीन कब्जे के इस मामले में चार लोगों पर केस दर्ज हुआ है। इनमें नजीबाबाद के अमीखानपुर निवासी जसविंदर ढिल्लो का नाम है।
श्यामली मोहल्ला निवासी विजय शंकर भी नामजद हैं। वे मूल रूप से देवरिया जिले के बरठी गांव के रहने वाले हैं। महावतपुर बिल्लौच निवासी धर्मपाल सिंह और लेखपाल डेविड पर भी केस है।
जमीन तीन दशक से बटाई पर थी
पुलिस के मुताबिक यह जमीन महेंद्रनाथ ने खरीदी थी। करीब तीन दशक से यह जमीन बटाई पर दी गई थी। बटाई यानी उपज बांटने की शर्त पर खेती के लिए जमीन देना। जमीन दूर क्षेत्र में थी और परिवार लंबे समय तक वहां नहीं गया। सोचिए एक बार। दूर की जमीन पर सालों तक कोई न जाए, तो क्या होगा?
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने क्या बताया
एसपी कृष्ण कुमार बिश्नोई ने इस मामले की जानकारी दी है। उनके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री के पिता ने जमीन बटाई पर दे रखी थी। लंबे समय तक कोई जमीन देखने नहीं आया। इसी का फायदा उठाकर आरोपियों ने कब्जे की कोशिश की।
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लेखपाल की भूमिका की जांच
एफआईआर में नामजद लेखपाल डेविड की भूमिका की भी जांच हो रही है। बताया गया है कि बुधवार को वह नजीबाबाद तहसील से रिलीव हुआ। उसका तबादला धामपुर तहसील में हुआ है।
पुलिस के मुताबिक लेखपाल ने धर्मपाल का कब्जा बताया था। यह बात तहसील में कही गई थी। करीब तीन साल पहले एंटी करप्शन टीम ने उसे रिश्वत लेते दबोचा था। पुलिस इस मामले में भी उसकी भूमिका की जांच कर रही है।

