श्रीहरिकोटा/नई दिल्ली: भारत ने अंतरिक्ष क्षेत्र में नया इतिहास रचते हुए अपने पहले निजी ऑर्बिटल रॉकेट ‘विक्रम-1’ का सफल प्रक्षेपण कर दिया। आंध्र प्रदेश के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र, श्रीहरिकोटा से दोपहर 12:05 बजे लॉन्च हुआ यह रॉकेट पहली ही कोशिश में सफलतापूर्वक अपनी निर्धारित कक्षा में स्थापित हो गया।
इस ऐतिहासिक उपलब्धि के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्काईरूट एयरोस्पेस के संस्थापक पवन कुमार चंदना से फोन पर बात कर पूरी टीम को बधाई दी। बातचीत के दौरान पवन कुमार ने प्रधानमंत्री से पूछा कि उन्होंने रॉकेट के साथ अंतरिक्ष में भेजने के लिए ‘वंदे मातरम्’ संदेश ही क्यों चुना।
इस पर पीएम मोदी ने कहा कि देश इस वर्ष ‘वंदे भारत’ की 150वीं वर्षगांठ मना रहा है और ‘वंदे मातरम्’ केवल एक नारा नहीं, बल्कि भारत की आज़ादी, आत्मगौरव और युवाओं की प्रेरणा का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा कि यही संदेश नई पीढ़ी के आत्मविश्वास और विकसित भारत के संकल्प का प्रतिनिधित्व करता है, इसलिए इसे अंतरिक्ष तक भेजा गया।
स्काईरूट टीम को PM का विशेष निमंत्रण
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जब उन्होंने ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना रखा था, तब कई लोगों ने उसका मजाक उड़ाया था, लेकिन आज भारत रक्षा, तकनीक और अंतरिक्ष जैसे क्षेत्रों में वैश्विक पहचान बना रहा है। उन्होंने कहा कि विक्रम-1 पूरी तरह भारत में विकसित निजी ऑर्बिटल रॉकेट है और इसकी सफलता देश के स्पेस सेक्टर में नई क्रांति की शुरुआत है।
प्रधानमंत्री ने स्काईरूट एयरोस्पेस की पूरी टीम को दिल्ली आकर मुलाकात करने का निमंत्रण भी दिया। इस मिशन के साथ भारत दुनिया के उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया है, जहां निजी कंपनियां सफलतापूर्वक ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च करने में सक्षम हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह उपलब्धि भारत के कमर्शियल स्पेस सेक्टर, स्टार्टअप इकोसिस्टम और वैश्विक अंतरिक्ष बाजार में देश की मजबूत भागीदारी की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी।

