नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परीक्षा पे चर्चा कार्यक्रम के दौरान देशभर के विद्यार्थियों से संवाद किया। इस अवसर पर उन्होंने पढ़ाई, जीवन लक्ष्य और आत्म-विकास को लेकर प्रेरणादायक बातें साझा कीं। साथ ही अपने 75वें जन्मदिन से जुड़ा एक रोचक अनुभव भी बताया, जिसने छात्रों को खूब हंसाया।
अभी तो मेरे 25 साल बाकी हैं- पीएम
प्रधानमंत्री मोदी ने छात्रों से अपने जन्मदिन का एक किस्सा साझा करते हुए बताया कि- हाल ही में उनके जन्मदिन पर एक नेता ने उन्हें फोन कर 75 वर्ष पूरे होने की बधाई दी। इस पर उन्होंने मुस्कराते हुए जवाब दिया —“मैं बीते वर्षों को नहीं गिनता, बल्कि उन वर्षों को गिनता हूं जो अभी बाकी हैं। मेरे 25 साल और शेष हैं।” इस बात पर कार्यक्रम में मौजूद छात्र-छात्राएं ठहाके लगाकर हंस पड़े।
“जो बीत गया, उस पर नहीं-जो आगे है, उस पर फोकस करें”
साथ ही पीएम मोदी ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि – वे अतीत की गलतियों में उलझने के बजाय भविष्य की संभावनाओं पर ध्यान दें। समय का सही उपयोग वही करता है, जो आगे बढ़ने की सोच रखता है।
क्या कुछ टॉपिक छोड़कर पढ़ना सही रणनीति है?
इस चर्चा के दौरान एक छात्रा ने पूछा कि- परीक्षा की तैयारी करते समय कई विद्यार्थी पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र देखकर कुछ टॉपिक छोड़ देते हैं। क्या यह तरीका सही है? जिसका पीएम मोदी ने जवाब देते हुए ने स्पष्ट किया कि- प्रश्नपत्र हमेशा सिलेबस के भीतर से ही आता है। समस्या यह है कि छात्र केवल चुनिंदा पैटर्न पर निर्भर हो जाते हैं, जिससे पेपर कठिन लगने लगता है। शॉर्टकट बुक्स, गेस पेपर और केवल महत्वपूर्ण प्रश्नों पर निर्भर रहना एक गलत आदत है।
अच्छे शिक्षक क्या करते हैं?
पीएम मोदी के अनुसार, अच्छे शिक्षक पूरे सिलेबस पर बराबर जोर देते हैं और छात्रों को विषय की गहराई समझाते हैं, न कि केवल परीक्षा में अंक बढ़ाने की रणनीति सिखाते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि शिक्षा केवल परीक्षा पास करने के लिए नहीं, बल्कि जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है। उन्होंने समझाया कि जैसे खिलाड़ी अपने पूरे शरीर को मजबूत बनाता है, वैसे ही विद्यार्थी को अपने संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास करना चाहिए। अल्टीमेट गोल सिर्फ अच्छे नंबर नहीं, बल्कि एक बेहतर इंसान बनना होना चाहिए।


