महानगरों के मास्टर प्लान को लेकर राजनीतिक खींचतान तेज, विधानसभा में कांग्रेस का तीखा विरोध

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भोपाल। विधानसभा के बजट का आठवां दिन सदन में बहस और विरोध देखने को मिला। कांग्रेस ने मोहन सरकार को नगरीय विकास में लापरवाही और आंतरिक संघर्ष का आरोप लगाया और जमकर विरोध किया। महानगरों के मास्टर प्लान और मेट्रो जैसी प्रमुख नगरीय परियोजनाओं में हो रही देरी पर विपक्ष ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए है। सरकार पर आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री और मंत्रियों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
सदन में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि नगरीय प्रशासन मंत्री को स्वतंत्र अधिकार क्यों नहीं दिए जा रहे? यदि मंत्री को अधिकार नहीं देना है तो फिर इस्तीफा ले लिया जाए। यदि वे मंत्री हैं, तो उन्हें काम करने दिया जाए। सिंघार के अनुसार, सरकार के भीतर की यह खींचतान ही मास्टर प्लान को डेढ़ वर्ष से अटका रही है।
मास्टर प्लान फाइल मुख्यमंत्री के पास लंबित
सिंघार ने कहा कि स्वयं नगरीय प्रशासन मंत्री विधानसभा में स्वीकार कर चुके हैं कि मास्टर प्लान की फाइल लंबे समय से मुख्यमंत्री के पास लंबित है। उन्होंने सवाल उठाया-सरकार की अंदरूनी लड़ाई का बोझ आम नागरिक क्यों उठाएं? यह सिर्फ देरी नहीं, बल्कि विकास रोकने का फैसला है।
मास्टर प्लान अटकने से शहरों के विकास पर लगा विराम
कांग्रेस का कहना है कि इंदौर, भोपाल, ग्वालियर सहित कई प्रमुख शहर स्पष्ट विकास योजना के अभाव में अव्यवस्थित विस्तार झेल रहे हैं। मास्टर प्लान न बनने का सीधा असर मेट्रो परियोजनाओं और शहरी ढांचागत विकास पर पड़ रहा है। सिंघार ने आरोप लगाया कि इसका लाभ अवैध कॉलोनियों को हो रहा है। सरकार से जुड़े लोग अवैध निर्माण जोड़कर वैध करा लेते हैं, जबकि आम नागरिक नियमों में फंसा रहता है, यह सरासर अन्याय है।
क्या जनता को सुव्यवस्थित विकास का अधिकार नहीं?
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि मास्टर प्लान में देरी प्रशासनिक कमजोरी से ज्यादा सरकार की संवेदनहीनता को दर्शाती है। सिंघार ने कहा कि इंदौर और भोपाल जैसे शहरों को तुरंत सुव्यवस्थित विकास की आवश्यकता है, लेकिन सरकार की आपसी खींचतान जनता के भविष्य को रोक रही है। कुल मिलाकर, विधानसभा में उठे कांग्रेस के इन सवालों ने सरकार की शहरी विकास नीति और आंतरिक समन्वय पर बड़ा राजनीतिक प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है।

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