Tuesday, June 2, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Hometrending newsकन्यादान योजना पर सियासत तेज: सत्ता और विपक्ष दोनों कटघरे में

कन्यादान योजना पर सियासत तेज: सत्ता और विपक्ष दोनों कटघरे में

लांजी-किरनापुर की बेटियों का दर्द सुनने वाला कौन? जनता पूछ रही सवाल, नेता खामोश!

लांजी। मुख्यमंत्री कन्यादान योजना को लेकर लांजी-किरनापुर विधानसभा क्षेत्र में अब जनआक्रोश खुलकर सामने आने लगा है। जिले की अधिकांश तहसीलों में सामूहिक विवाह कार्यक्रम संपन्न हो चुके हैं, लेकिन लांजी-किरनापुर क्षेत्र की हजारों गरीब बेटियां आज भी योजना का लाभ मिलने का इंतजार कर रही हैं। इसके चलते क्षेत्र में राजनीतिक माहौल गरमा गया है और सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष भी जनता के सवालों के घेरे में आ गया है।

ग्रामीण क्षेत्रों से सामने आ रही प्रतिक्रियाओं के अनुसार कई गरीब परिवारों ने अपनी बेटियों के विवाह की तैयारियां मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के भरोसे रोक रखी थीं। परिवारों को उम्मीद थी कि शासन द्वारा सामूहिक विवाह कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, लेकिन समय बीतने के बाद भी कोई स्पष्ट तिथि घोषित नहीं होने से लोगों में निराशा और नाराजगी दोनों बढ़ती जा रही हैं।

बेटियों के सपनों पर आखिर क्यों लगा इंतजार का ताला?

क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मुख्यमंत्री कन्यादान योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि गरीब परिवारों के सम्मान और उनकी बेटियों के भविष्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण योजना है। ऐसे में जब जिले की अन्य तहसीलों में कार्यक्रम आयोजित हो चुके हैं, तब लांजी-किरनापुर विधानसभा क्षेत्र को इससे वंचित रखना कई सवाल खड़े कर रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि हजारों बेटियां विवाह की आस लगाए बैठी हैं, लेकिन जिम्मेदार विभागों और जनप्रतिनिधियों की ओर से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिल रहा। गांव-गांव में अब एक ही चर्चा है कि आखिर इस क्षेत्र की बेटियों के साथ यह भेदभाव क्यों?

भाजपा विधायक राजकुमार कर्राहे पर उठ रहे सवाल

इस पूरे मामले में क्षेत्र के भाजपा विधायक राजकुमार कर्राहे भी जनता के सवालों का सामना कर रहे हैं। क्षेत्र में उन्हें जनता का लोकप्रिय नेता माना जाता है, लेकिन कन्यादान योजना के मुद्दे पर उनकी चुप्पी अब लोगों को खटकने लगी है।

ग्रामीणों का कहना है कि जब हजारों गरीब परिवार अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर परेशान हैं, तब क्षेत्र के विधायक को शासन स्तर पर पहल कर इस समस्या का समाधान निकालना चाहिए। कई लोगों का कहना है कि “लाडली बेटियों की खुशियां अधर में हैं और जनता अपने जनप्रतिनिधियों से जवाब चाहती है।”

आखिर कब जनता की आवाज बुलंद करेंगी हिना कावरे?

वहीं दूसरी ओर कांग्रेस की वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधानसभा उपाध्यक्ष हिना कावरे का नाम भी इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं में बना हुआ है। हाल ही में पार्टी संगठन में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके समर्थकों में उत्साह देखा गया, लेकिन क्षेत्र के लोगों का कहना है कि स्थानीय समस्याओं और गरीब परिवारों की पीड़ा पर भी उतनी ही मुखरता दिखाई जानी चाहिए।

जनता पूछ रही है कि चुनाव के दौरान महिलाओं, बेटियों और गरीब परिवारों के अधिकारों की आवाज उठाने वाले नेता आज इस गंभीर विषय पर मौन क्यों हैं? जब हजारों परिवार अपनी बेटियों के विवाह को लेकर चिंतित हैं, तब विपक्ष की ओर से भी कोई बड़ा आंदोलन या निर्णायक पहल सामने क्यों नहीं आ रही?

ग्रामीणों के बीच यह चर्चा भी तेज हो गई है कि क्या नेताओं को जनता और गरीब बेटियों की याद केवल चुनावी मौसम में ही आती है? चुनाव जीतने के बाद किए गए वादे और बड़े-बड़े दावे आखिर कहां खो जाते हैं?

गरीब परिवारों की उम्मीदों पर फिरा पानी?

क्षेत्र के कई परिवारों का कहना है कि कन्यादान योजना उनके लिए सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं थी, बल्कि उनकी बेटियों के सम्मान और भविष्य की सबसे बड़ी उम्मीद थी। लेकिन समय पर योजना का लाभ नहीं मिलने से उनकी उम्मीदें टूटती नजर आ रही हैं।

लोगों का आरोप है कि राजनीतिक दल एक-दूसरे पर आरोप लगाने में व्यस्त हैं, जबकि सबसे ज्यादा नुकसान उन गरीब परिवारों को हो रहा है जो अपनी बेटियों के हाथ पीले करने के लिए शासन की सहायता का इंतजार कर रहे हैं।

जनता का बड़ा सवाल

आज लांजी-किरनापुर विधानसभा क्षेत्र में एक ही सवाल सबसे ज्यादा गूंज रहा है—

“आखिर बेटियों के सपनों का जिम्मेदार कौन है?”

क्या सत्ता पक्ष और विपक्ष इस मुद्दे पर सिर्फ राजनीति करेंगे या फिर हजारों गरीब परिवारों की पीड़ा को समझते हुए कोई ठोस पहल भी करेंगे?

फिलहाल क्षेत्र की जनता प्रशासन, सरकार और जनप्रतिनिधियों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है। क्योंकि यह केवल एक योजना का मामला नहीं, बल्कि हजारों गरीब बेटियों के सपनों, गरीब माता-पिता के सम्मान और उनके भविष्य से जुड़ा सवाल है।

जब चुनाव आते हैं तो बेटियां याद आती हैं, लेकिन जब उनके विवाह और सम्मान का सवाल उठता है तो जिम्मेदार लोग खामोश क्यों हो जाते हैं? यही सवाल आज लांजी-किरनापुर की जनता सत्ता और विपक्ष दोनों से पूछ रही है।

RELATED ARTICLES

ई-पेपर

Bhopal- 24 to 30 May 2026
Bhopal- 17 to 23 May 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन