मुंबई। प्राइम वीडियो अपनी अगली हिंदी क्राइम थ्रिलर ‘दलदल’ के साथ दर्शकों को एक बेहद अंधेरी और बेचैन कर देने वाली दुनिया में ले जाने के लिए तैयार है। सीरीज का टीज़र रिलीज होते ही सोशल मीडिया पर चर्चा तेज़ हो गई है। महज़ 2 मिनट का यह टीज़र इतना असरदार है कि देखने वाले को बेचैनी और डर दोनों का एहसास करा देता है।
30 जनवरी को होगी स्ट्रीमिंग
प्राइम वीडियो ने साफ कर दिया है कि ‘दलदल’ का प्रीमियर 30 जनवरी को किया जाएगा। यह सीरीज मशहूर लेखक विष धमीजा की चर्चित किताब भेंडी बाजार से प्रेरित है और इसे एबंडेंशिया एंटरटेनमेंट ने प्रोड्यूस किया है। शो को सीरीज फॉर्मेट में ढालने का जिम्मा सुरेश त्रिवेणी ने संभाला है, जबकि निर्देशन अमृत राज गुप्ता ने किया है ।
मुंबई के अंडरबेली में उतरती कहानी
कहानी मुंबई की पृष्ठभूमि पर रची गई है और केंद्र में हैं डीसीपी रीता फरेरा, जिनका किरदार भूमि पेडनेकर निभा रही हैं । रीता एक तेज़, ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ पुलिस अफसर हैं, लेकिन उनके भीतर बीते समय की एक गलती और गहरे जख्म छिपे हैं। एक निर्दयी सीरियल किलर का पीछा करते हुए वह खुद ऐसे अंधेरे में उतर जाती हैं, जहां कानून और अंतरात्मा की सीमाएं धुंधली होने लगती हैं।
डर सिर्फ हिंसा से नहीं, दिमाग से पैदा होता है
‘दलदल’ की खास बात यह है कि यह सिर्फ मर्डर मिस्ट्री या क्राइम इन्वेस्टिगेशन तक सीमित नहीं रहती। टीज़र एक ऐसी दुनिया दिखाता है जहां मानसिक आघात, अपराधबोध और अंदरूनी डर कहानी के असली हथियार हैं। यह सीरीज सवाल उठाती है कि अपराध किसने किया, इससे ज़्यादा ज़रूरी यह है कि अपराध क्यों किया गया।
मजबूत कास्ट और दमदार क्रिएटिव टीम
भूमि पेडनेकर के साथ इस सीरीज में समारा तिजोरी और आदित्य रावल भी अहम भूमिकाओं में नज़र आएंगे। कहानी लेखन में सुरेश त्रिवेणी के साथ श्रीकांत अग्निस्वरन, रोहन डिसूजा, प्रिया सग्गी और हुसैन हैदरी शामिल हैं, जो शो को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक गहराई देते हैं।
प्राइम वीडियो का क्राइम सीजन होगा और भी डार्क
‘दलदल’ के साथ प्राइम वीडियो अपने क्राइम थ्रिलर लाइनअप की शुरुआत कर रहा है। आने वाले समय में प्लेटफॉर्म पर ‘क्रॉस’ सीजन 2, गाइ रिची की ‘यंग शर्लक’, ‘स्कार्पेटा’ (निकोल किडमैन और जैमी ली कर्टिस के साथ), ‘56 डेज’ और तेलुगु फिल्म ‘चीकटिलो’ जैसी कई बड़ी और इंटेंस पेशकशें भी देखने को मिलेंगी।
डर, तनाव और सच्चाई की परतें
‘दलदल’ सिर्फ एक सीरीज नहीं, बल्कि इंसानी दिमाग, नैतिकता और अधूरे ज़ख्मों की गहरी पड़ताल है—जहां हर किरदार अपनी ही दलदल में फंसा है, और बाहर निकलने की कीमत बहुत भारी हो सकती है।


