भोपाल। प्रदेश में संगीत शिक्षकों की भर्ती को लेकर डिग्री की मान्यता पर उठ रहे सवालों के बाद कई जिलों से सैकड़ों अभ्यार्थी राजधानी भोपाल जुटे। अभ्यार्थियों का कहना है कि देश के जाने-माने कला केंद्रों से प्राप्त संगीत प्रभाकर और संगीत विशारद की डिग्रियों की मान्यता को लेकर जो भ्रम की स्थिति है उसको प्रदेश सरकार स्पष्ट करे। बतादें कि अंतिम दस्तावेज सत्यापन के दौरान कई डिग्रियों की वैद्यता पर डीपीआई ने सवाल खड़े किए हैं।
मध्य प्रदेश के विभिन्न जिलों से लोक शिक्षण संचालनालय (डीपीआई) भोपाल में पहुंचे अभ्यार्थियों ने संगीत शिक्षक भर्ती प्रक्रिया में प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद और प्राचीन कला केंद्र चंडीगढ़ की डिग्रियों की मान्यता को लेकर स्पष्टीकरण और न्याय की मांग की।
उनका कहना है कि इन संस्थानों द्वारा प्रदत्त संगीत प्रभाकर और संगीत विशारद जैसी पारंपरिक उपाधियां देश के कई राज्यों में हाई कोर्ट, सुप्रीम कोर्ट, सीबीएसई और अन्य शैक्षणिक संस्थानों द्वारा मान्य रही हैं। यहां तक कि मध्य प्रदेश शासन ने 1974 में आदेश जारी कर इन उपाधियों को संगीत शिक्षक नियुक्ति के लिए मान्य माना था।
डिग्रियों की वैधता पर सवाल
प्रतिभागियों ने आरोप लगाया कि दस्तावेज सत्यापन के अंतिम चरण में डीपीआई ने इन डिग्रियों पर सवाल उठाए हैं, जबकि वे चार वर्षों से चयन प्रक्रिया पूरी होने का इंतजार कर रहे हैं। यह न केवल न्याय संगत अपेक्षा और न्याय सिद्धांतों के विरुद्ध है, बल्कि सैकड़ों अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ भी है।
भोपाल में डीपीआई अधिकारियों को अभ्यर्थियों ने 62 पृष्ठों का दस्तावेजी प्रमाण सौंपा, जिसमें विभिन्न न्यायालयों और संस्थानों के निर्णय शामिल थे। अधिकारियों ने शीघ्र न्यायोचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया।
गौरतलब है कि संगीत शिक्षक पद पर भर्ती के लिए मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल द्वारा पात्रता एवं चयन परीक्षाएं चार वर्ष पूर्व आयोजित की थीं जिसके उपरांत उत्तीर्ण हुए अभ्यार्थियों की डिग्री को डीपीआई द्वारा अवैद्य बताकर संकट खड़ा किया है। उल्लेखनीय है कि उत्तीर्ण अभ्यार्थी चार वर्षों से नौकरी का इंतजार कर हैं, और अब डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के अंतिम चरण में मान्यता पर सवाल उठना न्यायोचित नहीं है। नोटिफिकेशन प्रदान किए जाने के दौरान इस प्रकार की कोई बात सामने नहीं आई और अब इच्छानुसार अनेक नए शब्द जोड़कर परिवर्तन किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश शासन में अनेक अतिथि शिक्षक प्रभाकर व विशारद के आधार पर 3 वर्षों से अधिक शिक्षण का कार्य कर रहे हैं।
हाई कोर्ट ने दिया यह फैसला
गत 4 दिसंबर को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने प्रयाग संगीत समिति के पक्ष में निर्णय देते हुए केंद्रीय विद्यालय के खिलाफ भैरवी कुमारी को नियुक्त करने का आदेश दिया था, जो इन उपाधियों की वैधता को पुनः पुष्ट करता है। अभ्यर्थियों ने मांग की है कि डीपीआई सभी न्यायिक निर्णयों और साक्ष्यों के आधार पर जल्द स्पष्ट निर्णय लेकर उनके भविष्य को सुरक्षित करे।
संगीत शिक्षकों की डिग्रियों पर उठे सवाल, अभ्यार्थियों ने की सरकार से न्याय की मांग


