नई दिल्ली: ₹2,000 से अधिक के UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) या चार्ज लगाए जाने की चर्चाओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर अभी कोई निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी और फिलहाल RBI का मुख्य उद्देश्य UPI भुगतान प्रणाली को और मजबूत एवं प्रभावी बनाना है।
संसद में बिल पेश होने के बाद बढ़ी चर्चा
हाल ही में केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में एक विधेयक पेश किया, जिसके बाद यह चर्चा तेज हो गई कि सरकार ₹2,000 से अधिक के बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.4% तक MDR लगाने की अनुमति दे सकती है। माना जा रहा है कि सरकार उस कानून में संशोधन करना चाहती है, जो अब तक UPI भुगतान पर किसी भी तरह की मर्चेंट फीस लगाने से रोकता था।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
UPI पर संभावित मर्चेंट फीस को लेकर पूछे गए सवाल पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि इस विषय पर अभी कोई राय बनाना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी भुगतान प्रणाली को चलाने और विकसित करने में लागत आती है, जिसे किसी न किसी रूप में वहन करना ही पड़ता है। फिलहाल RBI का पूरा ध्यान UPI नेटवर्क को और मजबूत बनाने तथा उसकी क्षमता बढ़ाने पर है।
किसी न किसी रूप में लागत पहले से दी जा रही है
RBI गवर्नर ने कहा कि भले ही उपभोक्ता सीधे तौर पर कोई शुल्क नहीं दे रहे हों, लेकिन UPI सेवाओं की लागत किसी न किसी रूप में पूरी अर्थव्यवस्था वहन कर रही है। उन्होंने कहा कि यह खर्च आम उपभोक्ताओं तक प्रत्यक्ष रूप से दिखाई नहीं देता, लेकिन भुगतान प्रणाली को बनाए रखने और विकसित करने में लगातार निवेश किया जा रहा है।
UPI के विस्तार पर रहेगा फोकस
संजय मल्होत्रा ने कहा कि RBI का लक्ष्य देश में UPI के उपयोग को और बढ़ाना है। केंद्रीय बैंक रोजाना लगभग 80 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में UPI पर किसी प्रकार की फीस लगाने का फैसला लिया जाता है, तो उससे पहले उसके उपयोग और डिजिटल भुगतान प्रणाली पर पड़ने वाले प्रभाव का व्यापक आकलन किया जाएगा।
रेवेन्यू और इंफ्रास्ट्रक्चर दोनों पर ध्यान
RBI का कहना है कि आने वाले समय में UPI नेटवर्क के विस्तार और तकनीकी विकास के लिए पर्याप्त निवेश जरूरी होगा। इसके लिए दीर्घकालिक राजस्व के स्रोतों पर भी विचार किया जाएगा, लेकिन फिलहाल प्राथमिकता डिजिटल भुगतान प्रणाली को अधिक सुरक्षित, तेज और मजबूत बनाने की है।

