मुंबई : अगर आपके पास होम लोन, कार लोन या पर्सनल लोन है, तो अगले सप्ताह आने वाला भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का फैसला आपकी मासिक किस्त (EMI) पर सीधा असर डाल सकता है। RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 3 अगस्त से 5 अगस्त तक होगी और 5 अगस्त को गवर्नर संजय मल्होत्रा नीतिगत फैसलों की घोषणा करेंगे।बैंकिंग और वित्तीय बाजार की नजर इस बात पर टिकी है कि रेपो रेट में कोई बदलाव होगा या RBI फिलहाल ‘वेट एंड वॉच’ की रणनीति अपनाएगा।
क्या इस बार भी रेपो रेट रहेगा स्थिर?
अर्थशास्त्रियों और बैंकिंग विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल RBI रेपो रेट में बदलाव नहीं करेगा। इसकी बड़ी वजह महंगाई, वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और मानसून की स्थिति को लेकर बनी चिंता है। विशेषज्ञों के अनुसार, केंद्रीय बैंक फिलहाल आर्थिक संकेतकों पर नजर रखते हुए ‘देखो और इंतजार करो’ (Wait and Watch) की नीति अपना सकता है।
अभी कितना है रेपो रेट?
फिलहाल रेपो रेट 5.25% है। यह वही दर है, जिस पर RBI वाणिज्यिक बैंकों को अल्पकालिक कर्ज उपलब्ध कराता है। अगर रेपो रेट में बदलाव होता है, तो उसका असर सीधे बैंकों की ब्याज दरों और ग्राहकों की EMI पर दिखाई देता है।
आपकी EMI पर क्या होगा असर?
अगर रेपो रेट बढ़ता है
- होम लोन महंगा हो सकता है।
- कार और पर्सनल लोन की EMI बढ़ सकती है।
- नए लोन लेना पहले से महंगा पड़ सकता है।
अगर रेपो रेट घटता है
- लोन की ब्याज दरें कम हो सकती हैं।
- EMI घटने की संभावना बढ़ेगी।
- नए कर्ज लेना अपेक्षाकृत सस्ता हो सकता है।
अगर रेपो रेट नहीं बदला
- मौजूदा ब्याज दरों और EMI में फिलहाल कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।
महंगाई बनी RBI की सबसे बड़ी चिंता
विशेषज्ञों का कहना है कि महंगाई फिलहाल नियंत्रण में जरूर है, लेकिन कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक तनाव और मानसून से जुड़े जोखिम आगे चलकर महंगाई बढ़ा सकते हैं। ऐसे में RBI फिलहाल कोई जल्दबाजी नहीं करना चाहता।
हालांकि अगस्त में रेपो रेट स्थिर रहने की संभावना जताई जा रही है, लेकिन कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ती है, तो वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

