भोपाल: मध्यप्रदेश के करीब 15 हजार चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति के मामले में बड़ी राहत मिल सकती है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने स्पष्ट किया है कि तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT परीक्षा बाधक नहीं बनेगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि पदोन्नति के लिए CPCT परीक्षा पास करने की अनिवार्यता को लेकर जल्द सकारात्मक निर्णय लिया जाए। उन्होंने कहा कि सभी पात्र तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को पदोन्नति का लाभ मिलना चाहिए और CPCT की वजह से किसी कर्मचारी को पदोन्नति से वंचित या रिवर्ट नहीं किया जाना चाहिए।
CPCT अनिवार्यता के फैसले से शुरू हुआ विवाद
सामान्य प्रशासन विभाग ने 22 जुलाई को आदेश जारी कर पदोन्नति के लिए CPCT परीक्षा पास करना अनिवार्य कर दिया था। आदेश के मुताबिक, जिन कर्मचारियों के पास CPCT की डिग्री नहीं होगी, वे पदोन्नति के लिए पात्र नहीं माने जाएंगे।
ये भी पढ़े
MP में 10वीं-12वीं परीक्षा आवेदन में APAAR ID बनी बाधा, अनिवार्यता खत्म करने की मांग
इसके बाद जुलाई में की गई कुछ पदोन्नतियों की कार्रवाई को रद्द कर दिया गया और पदोन्नत किए गए चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को वापस उनके पुराने पद पर रिवर्ट कर दिया गया।
कर्मचारी संगठनों ने किया था विरोध
CPCT की अनिवार्यता के खिलाफ मध्यप्रदेश राज्य कर्मचारी संघ, तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ और लिपिक वर्गीय कर्मचारी संघ समेत कई कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों ने विन्ध्याचल भवन के सामने 22 जुलाई को जारी GAD के आदेश की प्रतियां जलाकर विरोध प्रदर्शन किया था। इस दौरान अधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी करते हुए आदेश वापस लेने की मांग की गई थी।
अनुकंपा नियुक्ति में भी CPCT बनी थी अड़चन
CPCT की अनिवार्यता का असर अनुकंपा नियुक्ति के मामलों में भी देखने को मिला। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अनुकंपा नियुक्ति में भी CPCT की शर्त लागू किए जाने के बाद कई मामलों में नियुक्ति प्रक्रिया प्रभावित हुई।
कुछ युवाओं को अपने पिता की असमय मृत्यु के बाद अनुकंपा के आधार पर नौकरी मिली थी, लेकिन CPCT की अनिवार्यता के चलते उन्हें नौकरी गंवानी पड़ी। इसके विरोध में नौकरी गंवाने वाले युवाओं ने मंत्रालय के सामने प्रदर्शन भी किया था। प्रदर्शन के दौरान कुछ युवाओं ने विरोध स्वरूप मुंडन कराया और सरकार से CPCT की अनिवार्यता खत्म करने की मांग की।
अब सरकार के फैसले का इंतजार
मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब तृतीय और चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की पदोन्नति में CPCT की अनिवार्यता को लेकर सरकार के स्तर पर जल्द निर्णय होने की उम्मीद है। इससे उन कर्मचारियों को राहत मिल सकती है, जिनकी पदोन्नति CPCT प्रमाणपत्र नहीं होने के कारण अटक गई थी।

