ईरान और अमेरिका के बीच युद्ध एक बार फिर बेहद गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। दोनों के बीच समझौते पर सहमति नहीं बनी और अब युद्ध फिर से तेज हो गया है।ईरान ने दावा किया है कि उसकी सेना IRGC ने एक अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर और अमेरिकी नौसेना के डिस्ट्रॉयर पर मिसाइलें दागी हैं।उसके जवाब में अमेरिका की ओर से भी पलटवार किया गया। अमेरिकी सेना की ओर से दावा किया गया है कि उन्होंने ईरान के तीन तेल टैंकरों पर हमला किया है। कुल मिलाकर होर्मुज से तेल टैंकरों का बाहर निकालना मुश्किल हो गया है। कच्चे तेल की सप्लाई अटक गई है. मिसाइल हमलों के बीच अब टैंकरों ने इस रास्ते से पूरी तरह से दूरी बना ली है। इन हमलों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखेगा एक दो दिन में कच्चे तेल के दाम में बड़ी तेजी देखने को मिल सकती
भारत के लिए टेंशन बड़ी
पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के चलते भारत का क्रूड बास्केट तेजी से बढ़ रहा है। भारतीय क्रूड बास्केट 2 सितंबर को 99.35 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अगस्त में यह कीमत 90.19 डॉलर प्रति बैरल की थाी जुलाई में 82.04 डॉलर प्रति बैरल ये आंकड़े भारत के बढ़ते आयात बिल को दिखा रहे हैं।
अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा बोझ
भारत अपनी कच्चे तेल की आवश्यकता का लगभग 90 फीसदी आयात से पूरा करता है।वैश्विक बाजार में तेल की बढ़ती कीमतें भारत के आयात बिल को बढ़ा रही है। चालू खाता घाटा बढ़ेगा और रुपये पर दबाव बढ़ता चला जाएगा तेल की बढ़ती कीमत महंगाई बढ़ाएगी जिससे परिवहन, विमानन, रसायन, प्लास्टिक और विनिर्माण सेक्टर पर असर पड़ेगा।

